पत्नी भरण-पोषण मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
🔴 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पत्नी की भरण-पोषण याचिका खारिज की
🔴 कोर्ट ने कहा- बिना ठोस कारण पति से अलग रहने पर केवल पति की आय के आधार पर भरण-पोषण नहीं
🔴 71,220 रुपये मासिक वेतन पाने वाले शिक्षक पति के खिलाफ पत्नी ने मांगा था भरण-पोषण
🔴 सात वर्षीय बेटी के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण की राशि बरकरार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पत्नी भरण-पोषण मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के पति से अलग रह रही है, तो केवल पति की आर्थिक स्थिति के आधार पर वह भरण-पोषण की हकदार नहीं हो सकती।

कोर्ट ने पत्नी की याचिका की खारिज
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने निर्मला जैन व अन्य बनाम केशव लाल जैन मामले की सुनवाई करते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी। मामले के अनुसार, निर्मला जैन और केशव लाल जैन का विवाह 25 मई 2015 को हुआ था। दोनों की एक बेटी है और दांपत्य विवाद के कारण अक्टूबर 2021 से दोनों अलग रह रहे हैं।
पति केशव लाल जैन नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक में शिक्षक हैं और उनका मासिक वेतन 71,220 रुपये है। पत्नी ने कुटुंब न्यायालय में आवेदन देकर पति की आय और अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए भरण-पोषण की मांग की थी।
पत्नी ने हाई कोर्ट में दायर की थी क्रिमिनल रिवीजन
कुटुंब न्यायालय ने 1 जुलाई 2026 को सुनवाई के बाद पत्नी का आवेदन खारिज कर दिया था। न्यायालय ने माना था कि पत्नी यह साबित करने में असफल रही कि वह किसी ठोस और उचित कारण से पति से अलग रह रही है। इसके बाद पत्नी ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन दायर कर पति की अधिक आय का हवाला देते हुए भरण-पोषण की मांग की।
धारा 125 के तहत जरूरी है उपेक्षा या भरण-पोषण से इनकार
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 125 के तहत भरण-पोषण का अधिकार पाने के लिए यह स्थापित करना आवश्यक है कि पति ने पत्नी की उपेक्षा की है या उसका भरण-पोषण करने से इनकार किया है। कोर्ट ने कुटुंब न्यायालय के रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया और पाया कि पत्नी यह साबित नहीं कर सकी कि वह पति से अलग रहने के लिए मजबूर थी।
कोर्ट ने कहा कि केवल पति के वेतन को आधार बनाकर पत्नी के पक्ष में भरण-पोषण का आदेश नहीं दिया जा सकता।
बेटी के लिए ₹5 हजार प्रतिमाह भरण-पोषण बरकरार
हाई कोर्ट ने नाबालिग सात वर्षीय बेटी के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण की राशि को उचित माना। कोर्ट ने कुटुंब न्यायालय के आदेश में किसी कानूनी त्रुटि के नहीं होने की बात कहते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पत्नी की याचिका खारिज कर दी।
