जगदलपुर के सिरहासार भवन में पारंपरिक विधि-विधान से डेरी गड़ाई संपन्न, मेम्बरीन ने खेली हल्दी; सांसद महेश कश्यप सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण रस्म डेरी गड़ाई गुरुवार को जगदलपुर स्थित सिरहासार भवन में पारंपरिक विधि-विधान और लोक-संस्कृति के साथ संपन्न हुई। इस रस्म के साथ बस्तर दशहरा के विशाल मांगलिक मंडप के निर्माण की आधारशिला रखी गई।
ग्राम बिलोरी से लाई गईं पवित्र लकड़ियां
पुरानी परंपरा के अनुसार नगर सीमा से लगे ग्राम बिलोरी से ग्रामीण दो विशेष काष्ठ स्तंभ लेकर सिरहासार भवन पहुंचे। स्थानीय बोली में इन काष्ठ स्तंभों को डेरी कहा जाता है।
सिरहासार भवन परिसर में मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद दोनों डेरी की विधिवत स्थापना की गई। इसके साथ ही मंडप आच्छादन से जुड़ा पारंपरिक विधान पूरा हुआ।
डेरी गड़ाई के बाद खेली गई हल्दी
डेरी स्थापना के बाद वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार मेम्बरीन द्वारा हल्दी खेलने की रस्म निभाई गई। इस दौरान पूरा परिसर उत्साह और उल्लास से भर गया। पारंपरिक आयोजन ने बस्तर दशहरा की लोक-सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी और महापौर संजय पाण्डे मौजूद रहे।
इसके अलावा कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
बड़ी संख्या में पारंपरिक मुखिया और श्रद्धालु पहुंचे
डेरी गड़ाई के इस मांगलिक आयोजन में विभिन्न परगनों से मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, गायता, सिरहा-गुनिया और पेरमा सहित बड़ी संख्या में पारंपरिक मुखिया और श्रद्धालु शामिल हुए।
डेरी गड़ाई की रस्म के साथ ही बस्तर दशहरा के आगामी पारंपरिक आयोजनों का सिलसिला आगे बढ़ गया है।
