रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में लागू ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026’ पर रोक लगाने की मांग वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने स्वयं याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसके बाद अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए मामला समाप्त कर दिया।

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🔴 धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम पर रोक की मांग वाली याचिका खारिज
🔴 सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने खुद वापस ली याचिका
🔴 हाईकोर्ट ने दोबारा इसी मुद्दे पर राहत की स्वतंत्रता नहीं दी
🔴 राज्य सरकार ने पुराने आदेशों का दिया हवाला
🔴 डिवीजन बेंच ने याचिका वापस मानते हुए किया खारिज
यह याचिका भिलाई निवासी 56 वर्षीय मोसेस लोगन ने दायर की थी। याचिका में नए धर्म स्वातंत्र्य कानून के संचालन, लागू होने और उसके प्रवर्तन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने अदालत को बताया कि इसी कानून को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं पहले भी दायर हो चुकी हैं, जिन्हें हाईकोर्ट पहले ही समयपूर्व मानते हुए खारिज कर चुका है।
राज्य सरकार की दलीलों और पूर्व के आदेशों का हवाला दिए जाने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई। इस पर राज्य सरकार ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई।
डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की सहमति के बाद याचिका को भविष्य में इसी मुद्दे पर दोबारा याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दिए बिना वापस मानते हुए खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने कहा कि याचिका वापस लिए जाने के कारण रजिस्ट्री की सभी तकनीकी आपत्तियां भी स्वतः समाप्त मानी जाएंगी।
