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🔴 मेडिकल कॉलेजों में सीटों के बराबर ही होगी इंटर्नशिप
🔴 दूसरे कॉलेजों के छात्रों का ट्रांसफर होगा सीमित
🔴 नियम तोड़ने पर 20 से 25 लाख तक पेनाल्टी का प्रावधान
🔴 आयुष एवं हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने जारी किए नए निर्देश
रायपुर। MBBS Internship Rules को लेकर आयुष एवं हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में केवल उतने ही छात्रों को इंटर्नशिप करने की अनुमति मिलेगी, जितनी वहां एमबीबीएस की स्वीकृत सीटें हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक इंटर्नशिप की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नए नियम लागू होने के बाद अंबिकापुर, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर या अन्य सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्र अब पैरवी या प्रभाव के आधार पर रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप ट्रांसफर नहीं करा सकेंगे। इससे मेडिकल कॉलेजों में क्षमता से अधिक इंटर्न रखने की समस्या समाप्त होने की उम्मीद है।
एमबीबीएस की साढ़े चार साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है, जिसके दौरान उन्हें हर महीने 15 हजार रुपये से अधिक स्टाइपेंड दिया जाता है। इसके बाद दो वर्ष की बांड सेवा अनिवार्य होती है, जिसमें लगभग 50 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है।
यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि बांड सेवा का पालन नहीं करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों पर 20 से 25 लाख रुपये तक की पेनाल्टी लगाई जा सकती है। नए नियमों का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप व्यवस्था को पारदर्शी, संतुलित और विवादमुक्त बनाना है।
