गुलझर के किसान ने एक एकड़ में अपनाई ग्राफ्टेड बैंगन की तकनीक, 30 हजार रुपये का अनुदान और 23 टन उत्पादन से बढ़ी आमदनी

महासमुंद। पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम गुलझर निवासी कृषक गौरव कुठारे ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती को अपनाकर बेहतर आमदनी का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
गौरव पारंपरिक धान की खेती के साथ उद्यानिकी फसलों पर भी जोर दे रहे हैं। आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
1.60 हेक्टेयर में सालभर करते हैं उद्यानिकी खेती
कृषक गौरव कुठारे अपने 1.60 हेक्टेयर क्षेत्र में वर्षभर अलग-अलग उद्यानिकी फसलों की खेती करते हैं। इनमें टमाटर, बैंगन, सेम और गेंदा जैसी फसलें शामिल हैं।
खेती में वे ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग करते हैं। इससे सिंचाई प्रबंधन और उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही बेहतर उत्पादन प्राप्त करने का अवसर भी मिलता है।
धान से आगे बढ़कर सब्जी की खेती को अपनाया
गौरव बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। बाद में उन्होंने उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की। इससे उन्हें अलग-अलग फसलों के उत्पादन के साथ बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिले।
सब्जी उत्पादन को खेती में शामिल करने से उन्हें वर्षभर आमदनी के नए अवसर भी मिलने लगे।
ग्राफ्टेड बैंगन के लिए मिला 30 हजार रुपये का अनुदान
वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन घटक से गौरव कुठारे को लाभ मिला।
योजना के तहत उन्हें एक एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हुआ। सरकारी सहायता मिलने के बाद उन्होंने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती को व्यवस्थित तरीके से अपनाया।
एक एकड़ से करीब 23 टन बैंगन का उत्पादन
गौरव के अनुसार ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से उन्हें करीब 23 टन उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पादित बैंगन को लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया।
इससे उन्हें करीब 2.65 लाख रुपये की सकल आमदनी प्राप्त हुई। ड्रिप, मल्चिंग और कृषि यंत्रों के उपयोग से उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में भी उन्हें सहायता मिली।
आसपास के किसानों को भी कर रहे प्रेरित
गौरव कुठारे की यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। वे स्वयं अन्य किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ सब्जी और अन्य उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
उनका मानना है कि उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर आधुनिक तकनीक के साथ खेती की जाए तो किसान अपनी पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय के अवसर तैयार कर सकते हैं।
आधुनिक तकनीक से खेती को मिल रही नई दिशा
गौरव की खेती में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से यह भी सामने आता है कि आधुनिक तकनीक खेती को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है।
ग्राफ्टेड बैंगन की खेती में सरकारी अनुदान, तकनीकी जानकारी और बेहतर प्रबंधन के जरिए उन्होंने अपनी खेती में एक नया प्रयोग किया, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और बाजार से आय प्राप्त हुई।
