गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ दस दिवसीय सांगीतिक उत्सव, राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ; बोले- राजा चक्रधर सिंह ने संगीत और कला को महलों से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाया

रायगढ़। कला और संगीत की नगरी रायगढ़ में ऐतिहासिक 41वें चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ हो गया है। गणेश चतुर्थी के अवसर से शुरू हुए इस दस दिवसीय सांगीतिक आयोजन की शुरुआत सोमवार को प्रदेश के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हुई।
राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के शुभारंभ के साथ ही रायगढ़ में अगले दस दिनों तक संगीत, नृत्य और कला की प्रस्तुतियों का सिलसिला देखने को मिलेगा।
राजा चक्रधर सिंह ने संगीत को महलों से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाया
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि रायगढ़ आकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि यह ऐसी नगरी है, जिसकी पहचान संगीत, नृत्य और कला से जुड़ी हुई है।
राज्यपाल ने कहा कि राजा चक्रधर सिंह ने कला और संगीत को संरक्षण देने के साथ इसे महलों की सीमाओं से निकालकर आम आदमी तक पहुंचाने का काम किया। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि राजा चक्रधर सिंह की कला साधना और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की जरूरत है।
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देश के कई हिस्सों में राजा चक्रधर सिंह के योगदान को जानने की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि संगीत के क्षेत्र में पारंगत राजा चक्रधर सिंह के योगदान के बारे में देश के कई हिस्सों के लोग अभी पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ऐसे में उनके योगदान और सांस्कृतिक विरासत को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि राजा चक्रधर सिंह के नाम पर असम में कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है, जो उनकी कला साधना और योगदान की व्यापक पहचान को दर्शाता है।
कथक को दिया नया घराना
राज्यपाल रमेन डेका ने राजा चक्रधर सिंह के संगीत और नृत्य के क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कथक को एक नया घराना देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि संगीत ऐसी कला है जो लोगों को जोड़ती है और समाज में एकता का संदेश देती है। राजा चक्रधर सिंह ने संगीत और कला को जिस तरह संरक्षण दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायी है।
देश के विकास में भी राजा चक्रधर सिंह का योगदान
समारोह में राज्यपाल ने राजा चक्रधर सिंह के योगदान के दूसरे पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर विशेष खुशी हुई कि राजा चक्रधर सिंह ने 1947 में भारत सरकार के साथ राज्य के विलय का निर्णय लिया था।
उन्होंने नागपुर रेलवे लाइन के निर्माण के लिए बड़ी जमीन दान किए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि राजा चक्रधर सिंह का योगदान केवल संगीत और कला तक सीमित नहीं था।
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दस दिनों तक सजेगा संगीत और कला का मंच
41वें चक्रधर समारोह के साथ रायगढ़ एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुतियों का केंद्र बनने जा रहा है। दस दिवसीय आयोजन में शास्त्रीय संगीत, नृत्य, पंडवानी, लोककला और अन्य सांगीतिक प्रस्तुतियां दर्शकों को देखने और सुनने को मिलेंगी।
चक्रधर समारोह रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हर वर्ष बड़ी संख्या में कला प्रेमी इस आयोजन का हिस्सा बनने पहुंचते हैं।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
समारोह के शुभारंभ अवसर पर रायगढ़ लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद, महापौर, सभापति सहित भाजपा के नेता, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
ऐतिहासिक चक्रधर समारोह के 41वें संस्करण के शुभारंभ के साथ ही रायगढ़ में अगले दस दिनों तक कला और संस्कृति का रंग देखने को मिलेगा।

