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🔴 70 वर्ष की उम्र में रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस
🔴 पंडवानी गायन को दिलाई विश्वभर में पहचान
🔴 पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से थीं सम्मानित
🔴 संघर्ष से शिखर तक पहुंची थीं लोक कला की महान हस्ती
रायपुर। तीजन बाई निधन की खबर से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के लोक कला जगत में शोक की लहर है। पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का शनिवार रात 3:15 बजे रायपुर एम्स में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं।

तीजन बाई निधन के साथ भारतीय लोक कला ने अपनी सबसे बड़ी हस्तियों में से एक को खो दिया है। उन्होंने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत कर पंडवानी गायन को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई।

24 अप्रैल 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी पहचान बनाई। समाज से बहिष्कृत होने के बावजूद उन्होंने पंडवानी गायन नहीं छोड़ा। मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और कापालिक शैली में पंडवानी प्रस्तुत करने वाली पहली महिला बनीं।
तीजन बाई निधन से कला जगत ने एक ऐसी कलाकार को खो दिया है, जिन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया। औपचारिक शिक्षा न मिलने के बावजूद उन्हें चार विश्वविद्यालयों ने डी.लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया था।
तीजन बाई निधन को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।
