आखिर किन शिक्षकों को मिला बड़ा सम्मान? बलरामपुर में शिक्षक दिवस पर सजा गौरव का मंच
जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में 21 उत्कृष्ट शिक्षक सम्मानित, 3 को ज्ञानदीप और 18 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार से नवाजा गया

बलरामपुर-रामानुजगंज। शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम भवन में जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं कल्याण, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम रहे।
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में गुरुजनों का योगदान अमूल्य है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के चरित्र, सोच और भविष्य का निर्माता होता है।
अनुशासन और संस्कारों पर दिया जोर
मंत्री ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने के साथ-साथ नैतिक मूल्य, अनुशासन और अच्छे संस्कार भी प्रदान करते हैं। वे बच्चों में स्वतंत्र सोच, रचनात्मकता और कुछ नया सीखने की जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशानुरूप जिले में युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रयास विद्यालय और नर्सिंग महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर सरकार लगातार काम कर रही है।
21 उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान
समारोह में जिले के 21 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार और विभिन्न विकासखंडों के 18 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार प्रदान किया गया।
ज्ञानदीप पुरस्कार से शासकीय माध्यमिक शाला कोरवापारा, राजपुर के शिक्षक श्याम सुंदर चौरगे, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डौरा की शिक्षिका नीलीमा एक्का और शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चिरई, शंकरगढ़ के प्रधान पाठक जवाहर लाल पैकरा को सम्मानित किया गया।
वहीं विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक सेवाओं के लिए 18 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार से नवाजा गया। सम्मान मिलने पर शिक्षकों में उत्साह का माहौल रहा।
अबूझमाड़ की संस्कृति पर पुस्तक का भी विमोचन
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में शिक्षा और संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू भी देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान लेखक शिव कुमार पाण्डेय की पुस्तक ‘बस्तर के लोक जीवन में वनस्पतियां’ का विमोचन किया गया। पुस्तक में अबूझमाड़ के लोक जीवन और वहां की वनस्पतियों से जुड़े विषयों को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
कलेक्टर ने शिक्षकों को बताया राष्ट्र निर्माण की धुरी
कार्यक्रम में कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए विद्यार्थियों का बेहतर मार्गदर्शन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को इस तरह दिशा दें कि वे आगे चलकर समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बन सकें।
समारोह में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पुष्पा नेताम, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष बबली देवी, नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी मौजूद रहे।
इसे भी पढ़े…..
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल
कृपया मेरे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करे : धन्यवाद…
रामधुनी में अचानक शामिल हुए डिप्टी CM विजय शर्मा, खुद बैठकर किया कीर्तन; जानिए क्या दिया संदेश
कवर्धा के ग्राम छीरहा में भक्तिमय रामधुनी कार्यक्रम में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, भगवान श्रीराम और लक्ष्मीनारायण की पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

कवर्धा। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ग्राम छीरहा स्थित हाईटेक नए बस स्टैंड और लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर के समीप आयोजित भक्तिमय रामधुनी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मीनारायण की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
रामधुनी टीम के साथ बैठकर किया कीर्तन
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने श्रद्धापूर्वक रामधुनी में सहभागिता की। वे रामधुनी टीम के सदस्यों के साथ बैठकर कीर्तन में भी शामिल हुए। उनके साथ मौजूद श्रद्धालुओं में भी उत्साह देखने को मिला।
भक्तिमय वातावरण में भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए उप मुख्यमंत्री ने प्रदेश की उन्नति और सभी नागरिकों के जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
धार्मिक आयोजनों से बढ़ता है प्रेम और सद्भाव
विजय शर्मा ने कहा कि धार्मिक और भक्तिमय आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा मिलता है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।
रामधुनी कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर भक्ति और धार्मिक वातावरण से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में सहभागिता कर भगवान श्रीराम का स्मरण किया।
श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। रामधुनी और कीर्तन के बीच भक्तिमय माहौल बना रहा। उप मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने से श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।
इसे भी पढ़े…..
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल
कृपया मेरे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करे : धन्यवाद…
आखिर किन शिक्षकों को मिला बड़ा सम्मान? नारायणपुर में शिक्षक दिवस पर सजा गौरव का मंच
ए.जी. ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह, 15 सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मानित; 6 को शिक्षा दूत और 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार

नारायणपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर नारायणपुर के ए.जी. ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
अनुशासन और संस्कारों से मिलती है सफलता
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अनुशासन, संस्कार, धैर्य और संकल्प के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने से सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि परिवार बच्चे की पहली पाठशाला है और माता-पिता तथा गुरुजनों का सम्मान हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने विद्यार्थियों से मोबाइल फोन का उपयोग पढ़ाई और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के लिए करने तथा इसके दुरुपयोग से बचने की अपील की। इस दौरान मंत्री ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए उनके साथ सेल्फी भी ली।
15 सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान
कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 15 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। इनमें श्री सुमेर सिंह मंडावी, श्रीमती उषा किरण बैस, श्री धनसिंह बघेल सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।
वहीं विकासखंड स्तर पर 6 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार और जिला स्तर पर 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर शिक्षकों में उत्साह का माहौल रहा।
अबूझमाड़ की संस्कृति पर पुस्तक का विमोचन
समारोह के दौरान लेखक शिव कुमार पाण्डेय द्वारा अबूझमाड़ की संस्कृति और लोक जीवन पर आधारित पुस्तक ‘बस्तर के लोक जीवन में वनस्पतियां’ का विमोचन भी किया गया।
पुस्तक के माध्यम से क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, लोक जीवन और वनस्पतियों से जुड़े सांस्कृतिक पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष इंद्रप्रस्थ बघेल, जनपद अध्यक्ष पिंकी उसेंडी, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल, डीएफओ डॉ. वेंकटेशा एमजी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों के महत्व का संदेश दिया गया।
इसे भी पढ़े…..
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल
कृपया मेरे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करे : धन्यवाद…
रायपुर में 3 शाम दिखेगा छत्तीसगढ़ का असली रंग, आखिर क्या खास है इस ‘लोकरंग पर्व’ में?
6 से 8 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर भरथरी, पंडवानी, नाचा, पंथी, करमा समेत कई लोक विधाओं की रंगारंग प्रस्तुतियां, शाम 7 बजे से शुरू होगा आयोजन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के तहत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 6, 7 और 8 सितंबर को रायपुर के सिविल लाइंस स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में होगा। कार्यक्रम प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से शुरू होगा।
भरथरी-पंडवानी से लेकर पंथी और करमा तक
‘लोकरंग पर्व’ में छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा। तीन दिनों के दौरान भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत जैसी प्रसिद्ध लोक विधाओं की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
इसके साथ ही सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए जाएंगे। लोकगीत और पारंपरिक गायन शैलियों में बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन की प्रस्तुतियां भी होंगी।
लोक कलाकारों को मिलेगा बड़ा मंच
यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
लोकगीतों, लोकगाथाओं, नृत्य और नाट्य शैलियों के जरिए प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक दर्शकों को देखने मिलेगी। पारंपरिक लोक वाद्यों की धुन और कलाकारों की प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर जीवंत करेंगी।
तीन शाम संस्कृति के नाम
6 से 8 सितंबर तक होने वाले इस आयोजन में रायपुर के लोगों को प्रदेश की अलग-अलग लोक विधाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, नृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्यों की गूंज से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा।
संस्कृति विभाग का उद्देश्य लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी है। ऐसे में ‘लोकरंग पर्व’ राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और संस्कृति को करीब से जानने का खास अवसर देगा।
