597 किमी की मौजूदा दूरी घटकर 465 किमी होने की उम्मीद, बस्तर-कांकेर-कोंडागांव से होकर विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंचेगा 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर

रायपुर। देश में बन रहे कई बड़े एक्सप्रेसवे के बीच रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर को मध्य भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। करीब 465 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर और कोंडागांव क्षेत्रों को ओडिशा के नवरंगपुर और कोरापुट से जोड़ते हुए आंध्र प्रदेश के रास्ते सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंच बनाएगा।
इस कॉरिडोर से केवल रायपुर और विशाखापट्टनम के बीच यात्रा आसान होने की उम्मीद नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के समुद्र से दूर क्षेत्रों के लिए व्यापार और माल परिवहन का नया रास्ता भी तैयार होगा।
597 से घटकर 465 किमी रह जाएगी दूरी?
फिलहाल रायपुर से विशाखापट्टनम की दूरी करीब 597 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से सफर में लगभग 13 से 14 घंटे लग सकते हैं। नए 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तैयार होने के बाद दूरी घटकर करीब 465 किलोमीटर होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही यात्रा का समय भी लगभग 5 से 6 घंटे तक आने का अनुमान है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 16,482 करोड़ से 20,000 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल यानी HAM के तहत कई पैकेजों में किया जा रहा है। परियोजना को दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य बताया गया है।
बस्तर के महुआ-इमली से लेकर हस्तशिल्प तक को मिलेगा बाजार
कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा वनांचल और अपेक्षाकृत दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजर रहा है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से महुआ, इमली, धान और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है।
रायपुर और विशाखापट्टनम जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों से कनेक्टिविटी बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों की बिक्री और परिवहन को गति मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
घने जंगलों के बीच बन रही 2.83 किमी की ट्विन टनल
इस परियोजना की इंजीनियरिंग विशेषताओं में 2.83 किलोमीटर लंबी 6-लेन ट्विन टनल प्रमुख है। यह सुरंग कोंडागांव और कांकेर के बीच पहाड़ी और वन क्षेत्र में बनाई जा रही है।
इसके अलावा ओडिशा सीमा के आसपास पहाड़ी और घाटी वाले इलाकों में सड़क निर्माण के लिए करीब 1.8 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वियाडक्ट भी बनाया गया है। इसका उद्देश्य कठिन भू-भाग में सड़क कनेक्टिविटी विकसित करना है।
वन्यजीवों के लिए भी किए जा रहे विशेष इंतजाम
कॉरिडोर का कुछ हिस्सा संवेदनशील वन और वन्यजीव क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए वाइल्डलाइफ अंडरपास, ओवरपास और साउंड बैरियर जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित/निर्मित की जा रही हैं।
बताया गया है कि मार्ग में 27 से अधिक वन्यजीव क्रॉसिंग और संबंधित संरचनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि सड़क के कारण वन्यजीवों की आवाजाही पर कम से कम असर पड़े और वाहनों के शोर को भी नियंत्रित किया जा सके।
विशाखापट्टनम पोर्ट से जुड़ने का क्या होगा फायदा?
छत्तीसगढ़ समुद्र सीमा से रहित राज्य है। ऐसे में विशाखापट्टनम पोर्ट तक तेज और सुगम सड़क कनेक्टिविटी राज्य के लिए व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है।
कॉरिडोर के चालू होने के बाद खनिज, कृषि उत्पाद और औद्योगिक सामान बंदरगाह तक कम समय में पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटने और निर्यात के नए अवसर बनने की संभावना है।
अगर परियोजना तय लक्ष्य के अनुसार दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू होती है, तो रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच कनेक्टिविटी के साथ-साथ बस्तर और आसपास के क्षेत्रों के व्यापारिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।



