तीन दिवसीय आयोजन में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं का जीवंत प्रदर्शन, पंडवानी, देवार गीत, करमा, लोरिक-चंदा और पंथी समेत कई लोकविधाओं की प्रस्तुतियां

रायपुर, 6 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की परंपराओं को संरक्षित करने और स्थानीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का रविवार को रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में भव्य शुभारंभ हुआ।
6 से 8 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकविधाओं की विविध रंगत देखने को मिल रही है। पहले दिन छत्तीसगढ़ी लोकधुनों और लोकगाथाओं ने दर्शकों को अपनी संस्कृति से जोड़ दिया।
भरथरी गाथा से हुई आयोजन की शुरुआत
लोकरंग पर्व के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत भरथरी गाथा की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद पंडवानी, देवार गीत सहित विभिन्न लोकविधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां कलाकारों ने दीं।
सुश्री दुर्गा साहू ने पंडवानी, श्रीमती पूनम तिवारी ने देवार गीत और सुश्री अरुणिमा शर्मा ने भरथरी गाथा की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ के लोकजीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
कई लोककलाओं का दिखा रंग
लोकरंग पर्व में प्रदेश की अलग-अलग पारंपरिक लोकविधाओं को मंच दिया जा रहा है। आयोजन में भरथरी गाथा, देवार गीत, करमा नृत्य, सरहुल, लोरिक-चंदा, ददरिया, पंडवानी और पंथी जैसी लोककलाओं की प्रस्तुतियां शामिल हैं।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं, लोकविश्वास और ग्रामीण जीवन से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम के संचालक एवं संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंचों के माध्यम से लोककलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ की ‘सुघर’ संस्कृति और लोकपरंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें प्रदेश के इतिहास, सामाजिक जीवन, लोकविश्वास और सामुदायिक परंपराओं की गहरी छाप दिखाई देती है।
कला-संस्कृति प्रेमियों की रही मौजूदगी
लोकरंग पर्व के शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, उपसंचालक उमेश मिश्रा, प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, बॉलीवुड अभिनेत्री श्वेता पड्डा, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा सहित कई गणमान्य नागरिक और कला-संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे।
8 सितंबर तक चलेगा लोकरंग पर्व
तीन दिवसीय लोकरंग पर्व 8 सितंबर तक जारी रहेगा। आगामी दिनों में भी छत्तीसगढ़ की विभिन्न लोकविधाओं से जुड़े कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित यह सांस्कृतिक उत्सव रायपुरवासियों को प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं, लोकसंगीत, लोकगाथाओं और लोकनृत्यों से रूबरू करा रहा है। आयोजन में छत्तीसगढ़ की माटी की महक और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है।
