23 सितंबर को 11वां आयुर्वेद दिवस, जिले में आयुष स्वास्थ्य शिविरों के जरिए संतुलित खान-पान, योग, ध्यान और नशामुक्ति के प्रति जागरूकता

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। स्वस्थ जीवन के लिए हमेशा बड़े बदलाव जरूरी नहीं होते। संतुलित भोजन, मौसम के अनुसार खान-पान, नियमित दिनचर्या, शारीरिक सक्रियता, योग, ध्यान और नशे से दूरी जैसे छोटे कदम भी बेहतर जीवनशैली की नींव बन सकते हैं। इसी संदेश के साथ 23 सितंबर 2026 को 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा।
इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” रखी गई है। आयुष मंत्रालय के अनुसार अब हर साल 23 सितंबर को ही आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा। इससे पहले यह दिन धनतेरस के अवसर पर मनाया जाता था, जिसकी तारीख हर वर्ष बदलती थी।
एमसीबी में आयुर्वेद का संदेश
वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों से समृद्ध एमसीबी जिले में आयुर्वेद का संदेश केवल उपचार तक सीमित नहीं है। भोजन, प्रकृति, दिनचर्या और मानसिक संतुलन को स्वस्थ जीवन का हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भरतपुर के दूरस्थ वनांचल, खड़गवां के ग्रामीण क्षेत्र और मनेन्द्रगढ़ के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में आयुष स्वास्थ्य शिविर, स्वास्थ्य परामर्श, योग और जीवनशैली जागरूकता जैसी गतिविधियां लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं।
रसोई से शुरू हो सकता है स्वस्थ जीवन
इस वर्ष की जागरूकता गतिविधियों में “रसोई घर से स्वास्थ्य” की अवधारणा पर भी जोर है। संतुलित भोजन, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों का उचित उपयोग और मौसम के अनुसार खान-पान स्वस्थ जीवनशैली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि किसी औषधीय पौधे, घरेलू नुस्खे या आयुर्वेदिक औषधि का इस्तेमाल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
योग, ध्यान और नशामुक्ति पर जोर
स्वस्थ जीवन केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, योग और ध्यान को भी स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।
युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक करना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आयुर्वेदिक उपचार में चिकित्सकीय सलाह जरूरी
आयुर्वेद में स्वास्थ्य संरक्षण और रोगों की रोकथाम के साथ विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार की परंपरा है। हालांकि किसी बीमारी में उपचार की उपयोगिता व्यक्ति की स्थिति और रोग की गंभीरता पर निर्भर करती है।
इसलिए गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में योग्य चिकित्सक से सलाह लेना और आवश्यक आधुनिक चिकित्सा में देरी नहीं करना जरूरी है।
23 सितंबर को स्वास्थ्य शिविर
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य शिविरों में नागरिकों को आयुर्वेद एवं होम्योपैथी चिकित्सकों से स्वास्थ्य संबंधी परामर्श मिलने की जानकारी दी गई है। आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क औषधि वितरण के साथ ऋतुचर्या, दिनचर्या, संतुलित आहार, मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति जैसे विषयों पर भी जागरूक किया जाएगा।
आयुर्वेद दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य को केवल बीमारी के बाद उपचार तक सीमित रखने के बजाय रोकथाम, संतुलित जीवनशैली और दैनिक स्वास्थ्य आदतों से जोड़ना है।
