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🔴 कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) इकोसिस्टम के लिए केंद्र से 50 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि
🔴 भारत सरकार की विशेष सहायता योजना के तहत राशि पाने वाला देश का पहला राज्य बना छत्तीसगढ़
🔴 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- किसानों की आय, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
🔴 CBG नीति-2026 से निवेश, रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) इकोसिस्टम के विकास के लिए भारत सरकार से 50 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह राशि पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना के तहत स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे स्वच्छ ऊर्जा, किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दी बधाई
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर ऊर्जा विभाग तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता राज्य को स्वच्छ ऊर्जा और जैव ईंधन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाली है।
CBG नीति से किसानों और पर्यावरण को होगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 राज्य के कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, पैडी स्ट्रॉ और अन्य बायोमास का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा और पराली सहित जैविक अवशेषों के बेहतर प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
हरित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए हरित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को जैव ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है।
निवेश, रोजगार और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि 8 जून 2026 को अधिसूचित छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। साथ ही किसानों की आय में वृद्धि होगी, जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई मजबूती मिलेगी। बायोगैस संयंत्रों से प्राप्त जैविक खाद खेती के लिए उपयोगी साबित होगी, जबकि कृषि अपशिष्ट से स्वच्छ गैसीय ईंधन का उत्पादन किया जाएगा।
