बकावंड के तारापुर गांव की सिद्धि स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बिना केमिकल और कृत्रिम रंगों के तैयार कीं इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं, गणेश चतुर्थी पर हाथों-हाथ बिका पूरा स्टॉक

बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के तारापुर गांव की महिलाओं ने अपनी मेहनत, हुनर और लगन से आत्मनिर्भरता की शानदार मिसाल पेश की है। ‘मिट्टी के गणेश मूर्ति निर्माण सिद्धि स्व सहायता समूह’ से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार कर महज कुछ ही हफ्तों में 1.80 लाख रुपये की कमाई की है।
समूह की महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों और अपने पारंपरिक हुनर का इस्तेमाल करते हुए शुद्ध मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं। खास बात यह रही कि प्रतिमाओं के निर्माण में किसी तरह के हानिकारक केमिकल और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया।
52 गणेश प्रतिमाएं तैयार, पूरा स्टॉक हाथों-हाथ बिका
शांति नागवंशी, दसो भारती और रोमा नागवंशी के नेतृत्व में समूह की महिलाओं ने गणेश चतुर्थी के लिए कुल 52 गणेश प्रतिमाएं तैयार की थीं। महिलाओं ने प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया।
बाजार में पहुंचते ही इन इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग बढ़ गई और समूह की सभी 52 प्रतिमाएं हाथों-हाथ बिक गईं। इससे महिलाओं को कुल करीब 1.80 लाख रुपये की आय हुई।
मिट्टी की मूर्तियों को लोगों ने किया पसंद
आज के दौर में गणेश प्रतिमाओं में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की मांग बढ़ रही है। तारापुर की महिलाओं ने इसी जरूरत को अवसर में बदलते हुए मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं।
हानिकारक रसायनों और कृत्रिम रंगों से दूरी रखते हुए तैयार की गई इन प्रतिमाओं को लोगों ने पसंद किया। इससे समूह की महिलाओं को न केवल आर्थिक लाभ मिला, बल्कि उनके हुनर को भी बाजार मिला।
अपनी बनाई मूर्तियों की पूजा होते देख भावुक हुईं महिलाएं
समूह की सदस्य शांति नागवंशी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अपने हाथों से बनाई गई गणेश प्रतिमाओं की लोगों द्वारा पूजा होते देखना उनके लिए बेहद खास अनुभव है।
उन्होंने बताया कि अपनी मेहनत से कमाई गई 1.80 लाख रुपये की राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा में किया जाएगा।
सीमित संसाधनों से शुरू हुआ काम बना कमाई का जरिया
तारापुर की महिलाओं ने सीमित संसाधनों के बीच इस काम की शुरुआत की थी। मेहनत और आपसी सहयोग से उन्होंने मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाना सीखा और धीरे-धीरे इसे आय के अवसर में बदल दिया।
गणेश चतुर्थी के दौरान मिली इस सफलता ने यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पारंपरिक हुनर और स्थानीय संसाधनों के जरिए महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भी बन सकती हैं।
दूसरी महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
तारापुर की सिद्धि स्व सहायता समूह की यह पहल अब बस्तर जिले में चर्चा का विषय बन रही है। महिलाओं की सफलता आसपास के क्षेत्रों की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
मिट्टी से गणेश प्रतिमा निर्माण के जरिए महिलाओं ने एक तरफ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ अपने हुनर को रोजगार और आय के साधन में बदलकर महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की है।
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