अंबिकापुर की थर्ड जेंडर मीरा रघुवंश ने UGC NET किया क्वालीफाई, संघर्षों को मात देकर रचा सफलता का नया अध्याय
ओडिसी नृत्य में बैचलर और मास्टर डिग्री के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना, तीसरे प्रयास में पहली बार परीक्षा देकर हासिल की सफलता

अंबिकापुर, 6 सितंबर 2026। समाज के ताने, उपेक्षा और बंदिशों के बावजूद अंबिकापुर की थर्ड जेंडर मीरा रघुवंश ने अपनी मेहनत और हौसले से बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मीरा ने देश की प्रतिष्ठित UGC NET परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। उनकी यह सफलता न केवल अंबिकापुर के लिए गर्व की बात है, बल्कि थर्ड जेंडर समुदाय के लिए भी प्रेरणा का संदेश बनी है।
मिशन चौक अंबिकापुर की रहने वाली मीरा की कहानी संघर्ष, साधना और मजबूत संकल्प की कहानी है। बचपन से ही पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि रही। शासकीय स्कूलों में पढ़ाई के दौरान जब दूसरे बच्चे खेलते थे, तब मीरा किताबों में अपने भविष्य की राह तलाशती थीं। हालांकि समाज की सोच और परिस्थितियों ने उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी कीं।
संगीत शिक्षक ने पहचानी छिपी प्रतिभा
मीरा के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया, जब उनकी मुलाकात अंबिकापुर के केंद्रीय विद्यालय में पदस्थ संगीत शिक्षक सुरेंद्र परीडा से हुई। उन्होंने मीरा के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें संगीत तथा कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सुरेंद्र परीडा के मार्गदर्शन में मीरा ने ओडिसी नृत्य सीखना शुरू किया। उनकी प्रतिभा लगातार निखरती गई और उनका चयन देश के प्रतिष्ठित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के लिए हुआ।
मीरा ने विश्वविद्यालय से ओडिसी नृत्य में पहले बैचलर डिग्री और उसके बाद मास्टर डिग्री हासिल की।
असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का देखा सपना
मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद मीरा ने असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देखा। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए UGC NET परीक्षा पास करना उनके लिए जरूरी था।
अंबिकापुर लौटने के बाद उन्होंने दो बार UGC NET का फॉर्म भरा, लेकिन समाज के डर, असफलता की आशंका और आत्मविश्वास की कमी के चलते दोनों बार परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सकीं।
थर्ड जेंडर समुदाय ने बढ़ाया हौसला
मीरा के जीवन में उनके समुदाय के साथियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब उन्हें पता चला कि मीरा परीक्षा देने से पीछे हट रही हैं, तो उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया।
साथियों ने मीरा से कहा कि परीक्षा देनी चाहिए, पास या फेल होना बाद की बात है, लेकिन परीक्षा देने का अनुभव जरूर मिलेगा। समुदाय के इस भरोसे ने मीरा के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा किया।
इसके बाद मीरा ने तीसरी बार हिम्मत जुटाई और पहली बार UGC NET परीक्षा में शामिल हुईं। पहले ही प्रयास में परीक्षा क्वालीफाई कर उन्होंने अपने सपने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की।
अब कानून की पढ़ाई कर रही हैं मीरा
UGC NET क्वालीफाई करने के बाद भी मीरा ने पढ़ाई का सफर नहीं रोका है। वर्तमान में वह राजीव गांधी शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर में LLB प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं।
मीरा का कहना है कि वह कानून की पढ़ाई इसलिए कर रही हैं, ताकि अपने जैसे लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठा सकें और जरूरत पड़ने पर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें।
सहपाठियों को भी मीरा पर गर्व
पीजी कॉलेज में मीरा के सहपाठी दीपक पांडेय उनकी मेहनत की सराहना करते हैं। उनका कहना है कि मीरा कक्षा की सबसे मेहनती छात्राओं में से एक हैं और उनकी सफलता पर सभी को गर्व है।
‘मौका मिले तो हम भी प्रोफेसर और वकील बन सकते हैं’
मीरा की सफलता ने थर्ड जेंडर समुदाय के बीच भी उम्मीद जगाई है। समुदाय का कहना है कि समाज में अक्सर यह धारणा देखने को मिलती है कि किन्नर समुदाय के लोग केवल बधाई मांगने या पारंपरिक कामों तक सीमित हैं, लेकिन मीरा ने अपनी मेहनत से इस सोच को चुनौती दी है।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि शिक्षा और अवसर का समान अधिकार मिले, तो थर्ड जेंडर समुदाय के लोग भी प्रोफेसर, वकील और अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
मीरा का संदेश- बराबरी का अवसर दीजिए
मीरा का संदेश साफ है कि थर्ड जेंडर समुदाय को अलग नजर से देखने के बजाय उन्हें भी शिक्षा और आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा पर हर व्यक्ति का अधिकार है, चाहे उसकी जेंडर पहचान कुछ भी हो।
मीरा रघुवंश की कहानी बताती है कि हुनर किसी पहचान का मोहताज नहीं होता और सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ अवसर और हौसले की जरूरत होती है।
इसे भी पढ़े…..
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल
कृपया मेरे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करे : धन्यवाद…
जांजगीर के 4 परिवार जम्मू-कश्मीर में बंधक बनाकर मजदूरी कराने के आरोप से मुक्त, 3 साल बाद 16 सदस्यों की घर वापसी
पुलवामा के ईंट भट्ठे में मजदूरी के बाद मेहनताना नहीं मिलने का आरोप, फोन से मिली जानकारी के बाद एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से किया समन्वय

जांजगीर-चांपा, 6 सितंबर 2026। रोजगार की तलाश में करीब तीन साल पहले जम्मू-कश्मीर गए जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले के चार परिवारों की मुश्किलें उस समय बढ़ गईं, जब पुलवामा क्षेत्र के एक ईंट भट्ठे में मजदूरी कराने के बाद भी मेहनताना नहीं दिए जाने और कथित तौर पर बंधक बनाकर काम कराने का मामला सामने आया। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ समन्वय कर चारों परिवारों को सुरक्षित मुक्त कराने में मदद की।
इस कार्रवाई के बाद बच्चों समेत कुल 16 सदस्यों की सकुशल घर वापसी कराई गई। करीब तीन साल बाद परिवारों के अपने घर लौटने पर परिजनों में खुशी का माहौल है।
रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे परिवार
बम्हनीडीह थाना क्षेत्र के ग्राम कपिस्दा निवासी नरेश बंजारे, पवन बंजारे और मधु खडेल तथा सक्ती जिले के बाराद्वार निवासी संतोष टंडन करीब तीन वर्ष पहले रोजगार की तलाश में एक व्यक्ति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे।
सभी पुलवामा क्षेत्र के एक ईंट भट्ठे में मजदूरी कर रहे थे। पीड़ित परिवारों के अनुसार, काम करने के बावजूद उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बंधन में रखकर जबरन काम कराया जा रहा था।
एक फोन कॉल से शुरू हुई मदद की कवायद
मुश्किल परिस्थितियों के बीच नरेश बंजारे ने किसी तरह फोन के माध्यम से अपने परिचित जवाहर टंडन को पूरे मामले की जानकारी दी। जवाहर ने इसकी सूचना भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष राम स्वरूप आजाद तक पहुंचाई।
इसके बाद भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव कलेश्वर खूंटे ने अपनी टीम के साथ जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी।
एसपी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से किया संपर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क और आवश्यक समन्वय स्थापित कराया।
पुलिस की पहल और समन्वय के बाद चारों परिवारों को सुरक्षित मुक्त कराया गया। बच्चों समेत सभी 16 सदस्यों की सकुशल वापसी सुनिश्चित की गई।
पुलिस ने अपने खर्च पर कराई घर वापसी
जांजगीर-चांपा पुलिस ने मानवीय पहल करते हुए सभी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को अपने खर्च पर ट्रेन के माध्यम से जांजगीर वापस लाया।
जांजगीर पहुंचने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलैंडन यार्क ने सभी परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इसके बाद पुलिस बस के माध्यम से सभी को सम्मानपूर्वक उनके गृह ग्राम रवाना किया गया।
तीन साल बाद घर लौटे परिवार, चेहरे पर लौटी मुस्कान
करीब तीन वर्षों तक अपने घर और परिजनों से दूर रहने के बाद जब चारों परिवार वापस गांव पहुंचे तो उनके परिजनों की खुशी देखते ही बनी। लंबे इंतजार के बाद परिवार के सदस्यों के सकुशल लौटने से घरों में राहत और खुशी का माहौल है।
इस पूरे मामले में पुलिस की पहल ने यह भी दिखाया कि जरूरत पड़ने पर पुलिस कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर संकट में फंसे लोगों की सुरक्षित घर वापसी में भी मदद कर सकती है।
इसे भी पढ़े…..
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल
कृपया मेरे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करे : धन्यवाद…
दिल्ली के सत्य निकेतन इमारत हादसे में दुर्ग के 20 वर्षीय छात्र की मौत, दोस्त से फोन पर बात करते-करते थम गई आवाज
दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था युवराज सोनी, हादसे से महज तीन दिन पहले छुट्टियां बिताकर दुर्ग से दिल्ली लौटा था

दिल्ली/दुर्ग, 6 सितंबर 2026। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हुए दर्दनाक इमारत हादसे में छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी 20 वर्षीय छात्र युवराज सोनी की मौत हो गई। युवराज दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था और सत्य निकेतन स्थित बॉयज पीजी में रहता था।
बताया जा रहा है कि युवराज छुट्टियों के बाद महज तीन दिन पहले ही अपने घर दुर्ग से दिल्ली वापस लौटा था। परिवार और दोस्तों को क्या पता था कि दिल्ली लौटने के कुछ ही दिनों बाद उनके बीच ऐसी दुखद खबर आएगी।
दोस्त से फोन पर हो रही थी बात, तभी आई तेज आवाज
हादसे के वक्त युवराज अपने बचपन के दोस्त आर्यन से फोन पर बातचीत कर रहा था। दोनों घूमने जाने का प्लान बना रहे थे। आर्यन के मुताबिक, बातचीत के दौरान अचानक फोन पर तेज और भयावह गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी।
आर्यन ने घबराकर कई बार युवराज को आवाज लगाई और पूछा कि वह ठीक है या नहीं, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। करीब एक मिनट बाद फोन कट गया।
इसके बाद आर्यन लगातार युवराज के दोबारा फोन करने का इंतजार करता रहा। कुछ समय बाद जब उसे सत्य निकेतन में इमारत गिरने की जानकारी मिली, तो उसे अपने दोस्त की चिंता सताने लगी। वह तुरंत घटनास्थल की ओर पहुंचा, जहां राहत और बचाव अभियान जारी था।
घंटों तलाश के बाद एम्स ट्रामा सेंटर से मिली खबर

आर्यन ने काफी देर तक घटनास्थल और आसपास युवराज की तलाश की। इसके बाद उसे एम्स ट्रामा सेंटर से जानकारी मिली कि हादसे में युवराज की मौत हो चुकी है।
जिस दोस्त से कुछ समय पहले फोन पर बातचीत हो रही थी, उसकी मौत की खबर ने आर्यन को गहरे सदमे में डाल दिया। उसके मुताबिक, फोन पर सुनाई दी वह अचानक आई गड़गड़ाहट और उसके बाद छाई खामोशी अब भी उसके जेहन में बनी हुई है।
परिवार कर रहा था बेटे के फोन का इंतजार
युवराज के परिवारवाले लगातार उससे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि उनका बेटा सुरक्षित होगा, लेकिन हादसे की खबर के बाद यह उम्मीद मातम में बदल गई।
युवराज और आर्यन बचपन के दोस्त थे और दोनों एक ही गांव से ताल्लुक रखते थे। युवराज की असमय मौत की खबर से परिवार के साथ-साथ उसके दोस्तों और परिचितों में भी शोक का माहौल है।
छुट्टियों के बाद दिल्ली लौटा था युवराज
युवराज पढ़ाई के लिए दिल्ली में रह रहा था। वह छुट्टियां बिताने के बाद तीन दिन पहले ही दुर्ग से वापस दिल्ली पहुंचा था। परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि बेटे के घर से लौटने के कुछ ही दिन बाद उसकी मौत की खबर सामने आई।
इसे भी पढ़े…..
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल
कृपया मेरे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करे : धन्यवाद…
बिलासपुर में ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’, राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षकों को किया सम्मानित; कहा- परिश्रम ही सफलता की कुंजी
एसईसीएल-डीएवी पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक सम्मानित, राज्यपाल ने समय के सदुपयोग और संस्कारों के महत्व पर दिया जोर

बिलासपुर, 6 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका रविवार को एसईसीएल-डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार, बिलासपुर में आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय और उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
समय का सदुपयोग सफलता के लिए जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि जीवन में समय का सही उपयोग बेहद महत्वपूर्ण है। आज का दौर इंटरनेट और तकनीक का है, जहां बच्चों और युवाओं के सामने ज्ञान और सूचनाओं के अनेक साधन उपलब्ध हैं। ऐसे में जरूरी है कि विद्यार्थी तकनीक का उपयोग सही दिशा में करते हुए अपने समय का सदुपयोग करें।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार हुआ है। प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने गुरुकुल परंपरा को याद किया, जहां शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को संस्कार और जीवन मूल्यों की सीख भी दी जाती थी।
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, देशभक्ति और नैतिक मूल्यों का विकास भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर मेहनत करने और चुनौतियों से घबराए बिना आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि परिश्रम करने वालों को सफलता जरूर मिलती है। जीवन में लगातार प्रयास करते रहना चाहिए और असफलताओं को आगे बढ़ने की सीख के रूप में लेना चाहिए।
परिवार और शिक्षक दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका
राज्यपाल ने समाज निर्माण में परिवार और शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि समाज को शिक्षित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक देने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से भी सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन जीने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि जीवन में जो कुछ मिला है, उसके प्रति संतोष और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए तथा वर्तमान का आनंद लेते हुए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उत्कृष्ट शिक्षकों का हुआ सम्मान
‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने सम्मानित शिक्षकों के समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए उनके योगदान को शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में एसईसीएल और डीएवी के बीच शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित सहयोग और साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। आयोजन को शिक्षकों के सम्मान, अनुभवों के आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में संभागायुक्त सुनील जैन, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, एसईसीएल के डायरेक्टर मानव संसाधन बिरंची दास, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन सहित एसईसीएल के अधिकारी-कर्मचारी, डीएवी प्रबंधन, विभिन्न प्रोजेक्ट स्कूलों के प्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
