पुलवामा के ईंट भट्ठे में मजदूरी के बाद मेहनताना नहीं मिलने का आरोप, फोन से मिली जानकारी के बाद एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से किया समन्वय

जांजगीर-चांपा, 6 सितंबर 2026। रोजगार की तलाश में करीब तीन साल पहले जम्मू-कश्मीर गए जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले के चार परिवारों की मुश्किलें उस समय बढ़ गईं, जब पुलवामा क्षेत्र के एक ईंट भट्ठे में मजदूरी कराने के बाद भी मेहनताना नहीं दिए जाने और कथित तौर पर बंधक बनाकर काम कराने का मामला सामने आया। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ समन्वय कर चारों परिवारों को सुरक्षित मुक्त कराने में मदद की।
इस कार्रवाई के बाद बच्चों समेत कुल 16 सदस्यों की सकुशल घर वापसी कराई गई। करीब तीन साल बाद परिवारों के अपने घर लौटने पर परिजनों में खुशी का माहौल है।
रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे परिवार
बम्हनीडीह थाना क्षेत्र के ग्राम कपिस्दा निवासी नरेश बंजारे, पवन बंजारे और मधु खडेल तथा सक्ती जिले के बाराद्वार निवासी संतोष टंडन करीब तीन वर्ष पहले रोजगार की तलाश में एक व्यक्ति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे।
सभी पुलवामा क्षेत्र के एक ईंट भट्ठे में मजदूरी कर रहे थे। पीड़ित परिवारों के अनुसार, काम करने के बावजूद उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बंधन में रखकर जबरन काम कराया जा रहा था।
एक फोन कॉल से शुरू हुई मदद की कवायद
मुश्किल परिस्थितियों के बीच नरेश बंजारे ने किसी तरह फोन के माध्यम से अपने परिचित जवाहर टंडन को पूरे मामले की जानकारी दी। जवाहर ने इसकी सूचना भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष राम स्वरूप आजाद तक पहुंचाई।
इसके बाद भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव कलेश्वर खूंटे ने अपनी टीम के साथ जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी।
एसपी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से किया संपर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क और आवश्यक समन्वय स्थापित कराया।
पुलिस की पहल और समन्वय के बाद चारों परिवारों को सुरक्षित मुक्त कराया गया। बच्चों समेत सभी 16 सदस्यों की सकुशल वापसी सुनिश्चित की गई।
पुलिस ने अपने खर्च पर कराई घर वापसी
जांजगीर-चांपा पुलिस ने मानवीय पहल करते हुए सभी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को अपने खर्च पर ट्रेन के माध्यम से जांजगीर वापस लाया।
जांजगीर पहुंचने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलैंडन यार्क ने सभी परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इसके बाद पुलिस बस के माध्यम से सभी को सम्मानपूर्वक उनके गृह ग्राम रवाना किया गया।
तीन साल बाद घर लौटे परिवार, चेहरे पर लौटी मुस्कान
करीब तीन वर्षों तक अपने घर और परिजनों से दूर रहने के बाद जब चारों परिवार वापस गांव पहुंचे तो उनके परिजनों की खुशी देखते ही बनी। लंबे इंतजार के बाद परिवार के सदस्यों के सकुशल लौटने से घरों में राहत और खुशी का माहौल है।
इस पूरे मामले में पुलिस की पहल ने यह भी दिखाया कि जरूरत पड़ने पर पुलिस कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर संकट में फंसे लोगों की सुरक्षित घर वापसी में भी मदद कर सकती है।




