प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिला 60 प्रतिशत अनुदान, 5 से 6 क्विंटल मछली उत्पादन से करीब एक लाख रुपये आय की उम्मीद

बलरामपुर। कभी पूंजी के अभाव में अधूरा रह गया मछली पालन का सपना अब बलरामपुर जिले के ग्राम करीचलगली की दुर्गावती सिरोटिया के लिए आत्मनिर्भरता का जरिया बन गया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिले शासकीय अनुदान और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन की मदद से उन्होंने बायोफ्लॉक तालाब तैयार कराया है।
दुर्गावती की लंबे समय से मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा थी। उनका उद्देश्य परिवार की आय बढ़ाने के साथ स्वयं का रोजगार खड़ा करना था, लेकिन पर्याप्त पूंजी नहीं होने के कारण वे अपना सपना पूरा नहीं कर पा रही थीं। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिली और उन्होंने योजना का लाभ लेकर मछली पालन शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
60 प्रतिशत सरकारी अनुदान से तैयार हुआ बायोफ्लॉक तालाब
वर्ष 2025-26 में दुर्गावती ने योजना के तहत बायोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इसके लिए मत्स्य विभाग की ओर से परियोजना लागत का 60 प्रतिशत शासकीय अनुदान दिया गया, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि उन्होंने स्वयं वहन की।
विभाग की ओर से उन्हें मछली पालन से संबंधित तकनीकी जानकारी, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग भी दिया गया। आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण मिलने से उनके लिए व्यवसाय शुरू करना आसान हुआ।
5 से 6 क्विंटल मछली उत्पादन की उम्मीद
बायोफ्लॉक तालाब तैयार होने के बाद दुर्गावती अब मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। उन्हें इस तालाब से लगभग 5 से 6 क्विंटल मछली उत्पादन की उम्मीद है।
उत्पादन के आधार पर करीब एक लाख रुपये तक की आय होने की संभावना है। अनुभव बढ़ने के साथ दुर्गावती भविष्य में मछली पालन के कारोबार को और विस्तार देने की योजना भी बना रही हैं।
अनुदान बना आत्मनिर्भरता का आधार
दुर्गावती बताती हैं कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण जिस काम को शुरू करने का सपना वर्षों से था, उसे शासकीय योजना ने पूरा करने का अवसर दिया। उनके लिए यह सहायता केवल अनुदान नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का माध्यम बनी है।
उनका कहना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं को आर्थिक सहयोग के साथ प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिले तो वे सीमित संसाधनों में भी अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
करीचलगली में तैयार बायोफ्लॉक तालाब अब दुर्गावती के लिए सिर्फ मछली उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि स्वरोजगार और आत्मनिर्भर भविष्य की शुरुआत बन चुका है।
उनकी पहल यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर ग्रामीण महिलाएं अपनी रुचि और हुनर को व्यवसाय में बदल सकती हैं। इससे न केवल परिवार की आमदनी बढ़ती है, बल्कि गांवों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलती है।



