बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि दैनिक वेतनभोगी के रूप में दी गई सेवाओं की अवधि के लिए भी कर्मचारी ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार द्वारा दायर सभी 9 रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।

🔴 Highlight Lines
🔴 हाई कोर्ट ने दैनिक वेतनभोगियों के पक्ष में सुनाया बड़ा फैसला
🔴 दैनिक वेतनभोगी सेवा अवधि पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी
🔴 राज्य सरकार की 9 रिट याचिकाएं हाई कोर्ट ने की खारिज
🔴 हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को फैसले से बड़ी राहत
यह मामला जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों सदानंद मानिकपुरी, बाबूलाल साहू, नैन सिंह क्षत्रिय, शैलेंद्र तिवारी सहित अन्य कर्मचारियों से जुड़ा था। कर्मचारियों ने वर्षों तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में सेवा देने के बाद नियमित नियुक्ति प्राप्त की थी। सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी ने उन्हें दैनिक वेतनभोगी अवधि की भी ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया था, जिसे राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि इसी तरह का मामला सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच के समक्ष लंबित है, इसलिए सुनवाई स्थगित की जानी चाहिए। वहीं कर्मचारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल इस आधार पर किसी मामले को लंबित नहीं रखा जा सकता कि समान मुद्दा बड़ी बेंच के पास विचाराधीन है। जब तक सर्वोच्च न्यायालय का नया निर्णय नहीं आता, तब तक पूर्व का कानून और निर्णय प्रभावी रहेंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने 22 से 25 वर्ष तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में लगातार सेवा दी है और बाद में नियमित हुआ है, तो विभाग को स्वेच्छा से ग्रेच्युटी का भुगतान करना चाहिए, न कि कर्मचारियों को अदालतों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना चाहिए।
हालांकि हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच कोई अलग फैसला सुनाती है, तो वही अंतिम रूप से दोनों पक्षों पर लागू होगा।
