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🔴 गंगरेल, मुरूमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर बांधों में बढ़ी पानी की आवक
🔴 किसानों की सिंचाई और शहरों की पेयजल चिंता हुई दूर
🔴 गंगरेल बांध 74.68% लाइव स्टोरेज तक पहुंचा
🔴 जल संसाधन विभाग ने बढ़ाई निगरानी, जल्द लबालब हो सकते हैं जलाशय
धमतरी। छत्तीसगढ़ में सक्रिय मानसून की लगातार बारिश से महानदी परियोजना (MRP कॉम्प्लेक्स) के प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक तेज हो गई है। गंगरेल (रविशंकर सागर), मुरूमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर बांधों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे खरीफ फसलों की सिंचाई के साथ-साथ राजधानी रायपुर सहित कई शहरों की पेयजल जरूरतों को लेकर भी बड़ी राहत मिली है।

गंगरेल बांध में 74.68 प्रतिशत लाइव स्टोरेज
जल संसाधन विभाग के अनुसार, गंगरेल (रविशंकर सागर) बांध का पूर्ण जलभराव स्तर (FRL) 347.75 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 343.75 मीटर तक पहुंच गया है। बांध में 399.81 मिलियन घनमीटर यानी करीब 74.68 प्रतिशत उपयोगी (लाइव) जल संग्रहित हो चुका है।
अन्य जलाशयों में भी बढ़ा जलस्तर
- मुरूमसिल्ली जलाशय का जलस्तर 423.21 मीटर दर्ज किया गया है, जहां 206.66 मिलियन घनमीटर (72.74%) पानी संग्रहित है।
- दूधावा बांध में जलस्तर 1388.48 मीटर तक पहुंच गया है और यहां 137.98 मिलियन घनमीटर पानी जमा है।
- सोंढूर जलाशय का जलस्तर बढ़कर 468.30 मीटर हो गया है, जहां 137.89 मिलियन घनमीटर पानी संग्रहित है।
सिंचाई और पेयजल के लिए बड़ी राहत
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि मानसून की सक्रियता इसी तरह बनी रही, तो अगले कुछ दिनों में सभी प्रमुख जलाशय पूरी क्षमता के करीब पहुंच सकते हैं। विभाग ने बांधों की सुरक्षा और जलस्तर की 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए हैं।
बांधों में बढ़ते जलभंडारण से खरीफ सीजन में किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध होगा। साथ ही महानदी परियोजना की नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जिससे कृषि और पेयजल दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
