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🔴 एमए करने के बाद नौकरी छोड़ अपनाई आधुनिक जैविक खेती
🔴 ₹150 प्रति किलो बिक रहा है जैविक चिन्नौर चावल
🔴 ड्रिप सिंचाई और समन्वित कृषि से बढ़ी आय
🔴 जैविक खेती में बने क्षेत्र के किसानों के रोल मॉडल
कांकेर। कभी माओवाद प्रभावित रहे कांकेर जिले के आमाबेड़ा तहसील के ग्राम चिचगांव के प्रगतिशील किसान सोनूराम ध्रुव ने आधुनिक जैविक खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (एमए) करने के बावजूद उन्होंने नौकरी की बजाय खेती को चुना और आज वैज्ञानिक तकनीकों व सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर सालाना 8 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं।

11 साल पहले शुरू की जैविक खेती
सोनूराम ध्रुव ने वर्ष 2015 में जैविक खेती की शुरुआत की। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। आज वे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत प्रमाणित किसान हैं और उन्हें CGOCERT से जैविक खेती का प्रमाण-पत्र भी प्राप्त है।
ड्रिप सिंचाई और समन्वित कृषि से बढ़ी आय
करीब 10 एकड़ कृषि भूमि में सोनूराम ध्रुव समन्वित कृषि प्रणाली अपनाते हैं। वे जैविक चिन्नौर धान, काला धान, गेहूं, उड़द, कुल्थी, रागी, काली हल्दी, काली मिर्च की खेती के साथ आम की बागवानी और गौ-पालन भी करते हैं। खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने से कम पानी में बेहतर उत्पादन मिल रहा है।
घर पर तैयार करते हैं जैविक खाद और कीटनाशक
सोनूराम बाजार की रासायनिक खादों पर निर्भर नहीं हैं। वे नींबू, पपीता, हर्रा और अन्य स्थानीय संसाधनों से जीवामृत, जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करते हैं। इससे खेती की लागत कम हुई है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी हुई है।
₹150 प्रति किलो बिकता है चिन्नौर चावल
सोनूराम प्रति एकड़ करीब 20 क्विंटल धान का उत्पादन लेते हैं। उनका शत-प्रतिशत जैविक चिन्नौर चावल बाजार में लगभग ₹150 प्रति किलो तक बिकता है। खेती, बागवानी और पशुपालन से उन्हें हर वर्ष 8 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
क्षेत्र के किसानों के लिए बने प्रेरणा
आज सोनूराम ध्रुव अपने क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि वैज्ञानिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
