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🔴 8 छात्राएं अचानक चीखने-चिल्लाने के बाद हुईं बेहोश
🔴 मेडिकल जांच में कोई गंभीर शारीरिक बीमारी नहीं मिली
🔴 कलेक्टर के निर्देश पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया परीक्षण
🔴 शिक्षा विभाग करेगा छात्राओं की काउंसलिंग
भिलाई। खम्हरिया स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में छात्राओं के अचानक बीमार होकर बेहोश होने की घटनाओं ने अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में कक्षा 9वीं और 11वीं की आठ छात्राएं एक जैसी रहस्यमयी स्थिति का शिकार हुई हैं।
चीखने लगीं, हाथ-पैर अकड़े और फिर हो गईं बेहोश
सोमवार को तीन छात्राएं अचानक चीखने-चिल्लाने लगीं। उनके हाथ-पैर अकड़ गए, आंखों से आंसू बहने लगे और कुछ ही देर बाद वे बेहोश होकर गिर पड़ीं। स्कूल प्रबंधन ने तुरंत उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां कुछ घंटों की निगरानी और उपचार के बाद उनकी हालत सामान्य हो गई। मेडिकल रिपोर्ट में कोई गंभीर शारीरिक समस्या सामने नहीं आई।

इससे पहले 9 जुलाई को पांच और 11 जुलाई को तीन छात्राओं में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई दिए थे।
कलेक्टर के निर्देश पर स्कूल पहुंची मेडिकल टीम
घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जिला अस्पताल दुर्ग के विशेषज्ञ डॉ. बालमुकुंद नेताम और डॉ. रानू नायडू की टीम स्कूल पहुंची। डॉक्टरों ने छात्राओं की जांच के बाद इसे मास हिस्टीरिया (Mass Psychogenic Illness) और शारीरिक कमजोरी से जुड़ी स्थिति बताया।
स्कूल की प्राचार्य सुषमा दीवान ने बताया कि सभी छात्राओं के स्वास्थ्य में सुधार है, लेकिन लगातार ऐसी घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है।
शिक्षा विभाग कराएगा काउंसलिंग
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा विभाग ने छात्राओं की मेडिकल जांच के साथ काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल स्कूल में स्वास्थ्य विभाग की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
क्या है मास साइकोजेनिक इलनेस (Mass Psychogenic Illness)?
विशेषज्ञों के अनुसार मास साइकोजेनिक इलनेस (MPI) एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें तनाव, भय या भावनात्मक दबाव के कारण एक जैसी शारीरिक प्रतिक्रियाएं समूह में तेजी से फैल सकती हैं। यह स्थिति विशेष रूप से किशोरावस्था के विद्यार्थियों में अधिक देखी जाती है।
इसके सामान्य लक्षणों में—
- चक्कर आना
- बेहोशी
- घबराहट
- सांस लेने में तकलीफ
- हाथ-पैर अकड़ना
शामिल हो सकते हैं, जबकि कई मामलों में किसी प्रकार की जैविक या शारीरिक बीमारी नहीं पाई जाती। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे प्रभावी समाधान काउंसलिंग, तनाव कम करना और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है।
