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🔴 तीन बाघों के शिकार मामले में पारधी गैंग की भूमिका की जांच
🔴 महाराष्ट्र पुलिस के हेड कांस्टेबल समेत नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर
🔴 रेंजर, डिप्टी रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड निलंबित
🔴 20 वर्षों में छत्तीसगढ़ से 29 बाघों की खाल बरामद
रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में तीन बाघों के शिकार के मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच का फोकस महाराष्ट्र की चंद्रपुर जेल में बंद कुख्यात शिकारी अजीत पारधी के नेटवर्क और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत पर है। शुरुआती जांच में बाघों के ऑन-डिमांड शिकार के संकेत भी मिले हैं।
महाराष्ट्र पुलिस नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा में तैनात हेड कांस्टेबल बियेश्वर गेड़ाम के संपर्क इंद्रावती टाइगर रिजर्व से लगे गांवों के तीन आदिवासी भाइयों से थे। बताया जा रहा है कि ये तीनों पहले नक्सल गतिविधियों की सूचना पुलिस तक पहुंचाते थे, लेकिन बाद में वन्यजीव शिकार में सक्रिय हो गए। आरोप है कि बाजार में बाघ की खाल की मांग आने पर गेड़ाम उनके नेटवर्क तक सूचना पहुंचाता था।
वन विभाग की इंटेलिजेंस विंग की कार्रवाई के दौरान बियेश्वर गेड़ाम और महाराष्ट्र होमगार्ड के जवान बाबूराव मंडावी को गिरफ्तार किया गया।
20 वर्षों में 29 बाघों की खाल बरामद
वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 वर्षों में छत्तीसगढ़ से 29 बाघों की खाल बरामद की जा चुकी है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में प्रदेश में 46 बाघ थे, जो वर्ष 2022 तक घटकर 17 रह गए।
तीन वनकर्मी निलंबित
बाघ शिकार मामले में कार्रवाई करते हुए रेंजर कमल सिंह कश्यप, डिप्टी रेंजर नरहरी सिंह बघेल और फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र वन विभाग संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
पारधी गैंग की भूमिका पर जांच
सूत्रों के मुताबिक इंद्रावती-अबूझमाड़-गढ़चिरौली का जंगल क्षेत्र लंबे समय से शिकारियों के निशाने पर रहा है। जांच एजेंसियां कुख्यात पारधी गैंग के सक्रिय नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। गैंग का सरगना अजीत पारधी फिलहाल महाराष्ट्र की चंद्रपुर जेल में बंद है, लेकिन उसके नेटवर्क के अब भी सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।
कैमरा ट्रैप लीक होने के दावों पर विभाग का जवाब
कैमरा ट्रैप की लोकेशन शिकारियों तक पहुंचने के दावों पर इंद्रावती टाइगर रिजर्व के निदेशक सुदीप बलगा ने इन आरोपों को भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि जिन बाघों का शिकार हुआ, वे विभाग के कैमरा ट्रैप में कभी दर्ज नहीं हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय ग्रामीणों से सूचना मिलने पर ही संबंधित क्षेत्रों में कैमरे लगाए जाते हैं।
