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🔴 क्लासरूम में घुसा मधुमक्खियों का झुंड, 72 विद्यार्थी प्रभावित
🔴 32 बच्चों को अस्पताल में भर्ती, 40 का स्कूल में हुआ उपचार
🔴 3 छात्राओं को सांस लेने में दिक्कत, ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया
🔴 शिक्षिका कनक मंडावी ने जान जोखिम में डालकर बच्चों को सुरक्षित निकाला
डोंगरगांव। राजनांदगांव जिले के बीजाभांठा शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। पहली कक्षा के दौरान स्कूल भवन के छज्जे पर बने मधुमक्खियों के छत्ते से अचानक झुंड क्लासरूम में घुस गया और विद्यार्थियों पर हमला कर दिया। इस घटना में कुल 72 छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए।

32 बच्चे अस्पताल पहुंचे, 3 छात्राओं को ऑक्सीजन देना पड़ा
मधुमक्खियों के हमले के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। 32 विद्यार्थियों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव में भर्ती कराया गया, जबकि 40 बच्चों का प्राथमिक उपचार स्कूल परिसर में ही किया गया।
हमले में विमला (10वीं), भनेश्वरी (12वीं) और नम्रता (11वीं) की हालत गंभीर हो गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर तीनों छात्राओं को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज मिलने से सभी की हालत अब सामान्य है।
शिक्षिका की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
घटना के दौरान कक्षा शिक्षिका कनक मंडावी ने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। खुद मधुमक्खियों के डंक का शिकार होने के बावजूद उन्होंने सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला और अंतिम छात्र के बाहर आने तक कक्षा नहीं छोड़ी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम तीन एंबुलेंस के साथ स्कूल पहुंची। बीएमओ डॉ. रागिनी चंद्रे ने बताया कि अधिकांश बच्चों को दर्द और घबराहट की शिकायत थी। त्वरित उपचार के बाद सभी विद्यार्थी खतरे से बाहर हैं और अधिकांश को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पहले से था मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता
जानकारी के अनुसार, स्कूल की नई इमारत के छज्जे पर लंबे समय से मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता बना हुआ था। आशंका है कि किसी पक्षी द्वारा छत्ते को छेड़ने के बाद मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि छत्ता पहले से मौजूद था तो उसे समय रहते हटाया क्यों नहीं गया?
छत्ता हटाने की कार्रवाई शुरू
स्कूल की प्राचार्य शोभा श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के तुरंत बाद मधुमक्खियों का छत्ता हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सुरक्षा की दृष्टि से संबंधित भवन में फिलहाल कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी।
स्कूलों में सुरक्षा ऑडिट की जरूरत
इस घटना ने स्कूल परिसरों में नियमित सुरक्षा निरीक्षण (Safety Audit) की आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल भवनों, छज्जों, पेड़ों और अन्य स्थानों की नियमित जांच कर संभावित खतरों को समय रहते दूर किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
