कोंडागांव के बावनपुरी में करीब 11 लाख रुपए की लागत से मिश्रित वृक्षारोपण, 2,667 मानव दिवस रोजगार का हुआ सृजन

रायपुर, 7 सितंबर 2026। विकसित भारत-जीरामजी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के तहत ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनसे ग्रामीण परिवारों को गांव में ही रोजगार और आय का अवसर मिले तथा भविष्य के लिए उपयोगी प्राकृतिक संपदा भी तैयार हो।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस पहल का असर कोंडागांव जिले के जनपद पंचायत बड़ेराजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बीरापारा के आश्रित ग्राम बावनपुरी में देखने को मिल रहा है। यहां समुदाय के लिए पंक्तिबद्ध मिश्रित वृक्षारोपण का कार्य किया गया है। इसके तहत 5 हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग प्रजातियों के 5,500 पौधे लगाए गए हैं।
इस वृक्षारोपण कार्य के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया है। योजना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
करीब 11 लाख रुपए की लागत से 2,667 मानव दिवस रोजगार
बावनपुरी में संचालित वृक्षारोपण परियोजना पर करीब 11 लाख रुपए की लागत आई है। इस कार्य से कुल 2,667 मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ है। ग्रामीण श्रमिकों को 300 रुपए प्रतिदिन की दर से मजदूरी उपलब्ध कराई जा रही है।
इससे ग्रामीण परिवारों को अपने गांव में ही आय का साधन मिला है। रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम करने की दिशा में भी यह पहल मददगार साबित हो रही है।
13 प्रजातियों के पौधों से बढ़ेगी हरियाली
मिश्रित वृक्षारोपण के तहत कुल 13 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। आने वाले वर्षों में इन पौधों के पेड़ बनने से क्षेत्र में हरियाली का विस्तार होने की उम्मीद है।
वृक्षारोपण से मिट्टी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ जैव विविधता तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी। पौधों के संरक्षण और संवर्धन में ग्राम बावनपुरी की संयुक्त वन प्रबंधन समिति भी ग्रामीणों की भागीदारी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
गांव में ही रोजगार और आजीविका का अवसर
विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत जिला प्रशासन ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनसे ग्रामीणों को उनके गांव में ही रोजगार मिल सके। वृक्षारोपण जैसे कार्य इस उद्देश्य को दो स्तरों पर पूरा कर रहे हैं।
एक ओर ग्रामीणों को तत्काल मजदूरी के रूप में रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर आने वाले वर्षों के लिए हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों का आधार तैयार हो रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
बावनपुरी का यह वृक्षारोपण कार्य रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का उदाहरण बन रहा है। ग्रामीणों की भागीदारी से पौधों की देखरेख और संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में यह क्षेत्र अधिक हरा-भरा होने के साथ स्थानीय पर्यावरण के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
