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यमन में बढ़ते संघर्ष और सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे पर हमलों से आपूर्ति संकट की आशंका, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 2% से ज्यादा चढ़ीं

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और यमन में तेज होते संघर्ष के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।
बाजार में इस तेजी की प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव, सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता मानी जा रही है। यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बाजार में बनी हुई है।
ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर के पार
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत में सोमवार को जोरदार बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड 2.90 डॉलर यानी 2.77 प्रतिशत बढ़कर 107.51 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
बाजार खुलने के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत में बढ़त 3 प्रतिशत से भी ज्यादा रही थी। इससे संकेत मिला कि निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों में पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंता काफी बढ़ी हुई है।
WTI क्रूड भी 102 डॉलर के पार
अमेरिकी कच्चे तेल के बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स में भी तेजी देखने को मिली। WTI की कीमत 2.27 डॉलर यानी 2.27 प्रतिशत बढ़कर 102.32 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
इस तरह दोनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई। तेल बाजार में इस तेजी को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित आपूर्ति जोखिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे पर हमलों से बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे और लाल सागर में उसके जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे हमलों से तेल के उत्पादन, परिवहन और निर्यात पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
सऊदी अरब वैश्विक तेल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में उसके तेल प्रतिष्ठानों या परिवहन मार्गों पर किसी भी बड़े व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है।
सऊदी अरब की अहम तेल पाइपलाइन पहले से बंद
तेल बाजार की चिंता उस समय और बढ़ गई है जब सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन पहले ही बंद बताई जा रही है। ऐसे में बाजार में यह आशंका मजबूत हुई है कि अगर क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें केवल उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि परिवहन मार्गों और सप्लाई चेन की सुरक्षा पर भी निर्भर करती हैं। पश्चिम एशिया में किसी बड़े मार्ग के बाधित होने की स्थिति में इसका असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है।
लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा भी चिंता का विषय
लाल सागर वैश्विक समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है। यहां जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ने से तेल और अन्य सामान के समुद्री परिवहन पर दबाव बढ़ सकता है।
यदि जहाजों को वैकल्पिक लंबे मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है तो परिवहन लागत और डिलीवरी समय दोनों बढ़ सकते हैं। बाजार इसी संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए तेल की कीमतों में तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता आपूर्ति में संभावित व्यवधान को लेकर है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बने रहने की स्थिति में उत्पादन और परिवहन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल बाजार भविष्य में आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का अनुमान लगा रहा है। इसी वजह से भू-राजनीतिक तनाव की हर नई खबर का असर कच्चे तेल की कीमतों पर तुरंत दिखाई दे रहा है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।
अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं तो आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर असर कई अन्य कारकों के साथ-साथ सरकारी नीतियों और घरेलू मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करता है।
आगे बाजार की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की नजर पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति और तेल आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। यदि तनाव कम होता है तो आपूर्ति संबंधी चिंताओं में राहत मिल सकती है, लेकिन संघर्ष बढ़ने पर तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
सोमवार की तेजी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
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