बीड के पाटोदा में सरकारी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद फैसला, हैदराबाद-सतारा-औंध गजट और कुंबी रिकॉर्ड को लेकर जरांगे की मांग जारी

बीड। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने गुरुवार को 20 दिन से जारी अपना अनशन खत्म कर दिया। यह फैसला बीड जिले के पाटोदा में महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया। जरांगे ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए तीन महीने का समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा और इसे मुंबई तक ले जाया जाएगा।
पाटोदा में सरकार के प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत
जरांगे जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर मार्च पर निकले थे। इसी दौरान वह पाटोदा में रुके, जहां सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और दादा भुसे, विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। सरकार की ओर से जरांगे को मराठा आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया में अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी गई।
सरकार की ओर से जरांगे से कहा गया कि वह अपने तीन प्रतिनिधि नियुक्त करें, जो उनकी मांगों पर चल रही सरकारी प्रक्रिया की प्रगति पर नजर रख सकें। विखे पाटील ने यह भी कहा कि एडवोकेट जनरल की लिखित राय मिलने के बाद कोल्हापुर और सतारा गजट से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में करीब तीन से चार महीने लग सकते हैं।
गजट और कुंबी रिकॉर्ड को लेकर जरांगे की मांग
जरांगे की प्रमुख मांग ऐतिहासिक प्रशासनिक रिकॉर्ड को मान्यता देने से जुड़ी है। इनमें हैदराबाद गजट, सतारा गजट और औंध गजट शामिल हैं।
जरांगे का कहना है कि इन रिकॉर्ड के आधार पर मराठा समुदाय के लोग अपनी कुंबी वंशावली साबित कर सकेंगे और पात्र लोगों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
उन्होंने सरकार से लिखित आश्वासन की मांग भी रखी है कि उपलब्ध कुंबी रिकॉर्ड में से किसी रिकॉर्ड को हटाया या नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
तीन महीने बाद फिर आंदोलन की चेतावनी
अनशन खत्म करने के बावजूद जरांगे ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार को तीन महीने का समय देते हुए कहा कि यदि इस दौरान उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो वह फिर से आंदोलन शुरू करेंगे और मुंबई का रुख करेंगे।
उन्होंने मुंबई की ओर पहुंच चुके बड़ी संख्या में मराठा समर्थकों से फिलहाल वापस घर लौटने की अपील भी की।
जरांगे का प्रस्तावित मार्च अंतरवाली सराटी से शुरू हुआ था और उन्हें अहिल्यानगर, पुणे तथा रायगढ़ के खोपोली से होते हुए मुंबई पहुंचना था। ताजा घटनाक्रम के बाद फिलहाल मुंबई मार्च को स्थगित कर दिया गया है।
सरकार ने 12 मांगें स्वीकार किए जाने की बात कही
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जरांगे के अनशन खत्म करने के फैसले का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार ने जरांगे की 13 में से 12 मांगें स्वीकार कर ली हैं, जबकि एक मांग के सामने कानूनी अड़चन है। सरकार ने स्वीकार की गई मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पिछले आंदोलन के बाद फिर उठा आरक्षण मुद्दा
मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में लंबे समय से आंदोलन का विषय रहा है। पिछले वर्ष भी जरांगे के आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक मुंबई पहुंचे थे। इस बार भी आंदोलन ऐसे समय में हुआ जब राज्य में गणेश उत्सव चल रहा है और सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी।
फिलहाल जरांगे ने अनशन रोक दिया है और सरकार को तीन महीने का समय दिया है। अब इस अवधि में मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों पर सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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