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रायपुर की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल, ईडी ने प्रश्नपत्र लीक और चयन में कथित गड़बड़ी से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच का दावा किया

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन में अनियमितता और भ्रष्टाचार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 22 सितंबर 2026 को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में सात लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसके साथ करीब 3,700 पन्नों के दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए हैं।
ईडी की जांच का आधार CGPSC परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर दर्ज पहले के मामलों से जुड़ा है। एजेंसी ने जांच में बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल किए जाने की बात कही है।
सात लोगों को बनाया गया आरोपित,
ईडी की अभियोजन शिकायत में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD चेतन कुमार बोरघरिया, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर, श्रवण कुमार गोयल, ललित गणवीर और डॉ. विकास चंद्राकर के नाम शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार शिकायत में आरोपितों की कथित भूमिकाओं को अलग-अलग तरीके से दर्ज किया गया है।
3 करोड़ रुपये से अधिक की रकम की जांच
ईडी के अनुसार जांच में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर वसूली गई रकम और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने 2021 की परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम जुटाई और उन्हें पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने तथा चयन में मदद का भरोसा दिया।
ईडी ने चेतन बोरघरिया के साथ उत्कर्ष चंद्राकर के कथित वित्तीय लेन-देन और डिजिटल बातचीत की भी जांच की है। एजेंसी के अनुसार तलाशी के दौरान मिले डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में पैसों से जुड़े संवाद सामने आए।
CSR भुगतान को भी जांच से जोड़ा
ईडी ने श्रवण कुमार गोयल से जुड़े CSR भुगतान की भी जांच की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक एजेंसी का आरोप है कि ग्रामीण विकास समिति से जुड़े एक NGO को 45 लाख रुपये का CSR भुगतान किया गया था और इसे कथित तौर पर CGPSC चयन से जुड़े लाभ के संदर्भ में देखा गया। मामले में गोयल के बेटे और बहू के चयन से जुड़े तथ्यों की भी जांच की गई है।
ललित गणवीर की भूमिका भी जांच के दायरे में
ललित गणवीर, जो उस समय CGPSC में डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन के पद पर थे, की भूमिका को भी ईडी ने अपनी शिकायत में शामिल किया है। जांच में परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।
संपत्तियों पर भी कार्रवाई
ईडी ने इस मामले में संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। एजेंसी की जांच के तहत आरोपितों से जुड़ी संपत्तियों को लेकर अस्थायी कुर्की की कार्रवाई की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 21 सितंबर को करीब 47.54 लाख रुपये मूल्य की छह संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गईं।
मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में
यह पूरा मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। ईडी द्वारा लगाए गए आरोप और जांच में सामने आए दावे अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के अधीन हैं। आरोपितों के खिलाफ दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।
