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🔴 जल संरक्षण से कालामांजल गांव में आया बड़ा बदलाव
🔴 कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम से सालभर मिला पानी
🔴 250 से अधिक ग्रामीणों को मिला रोजगार
🔴 खेती, मत्स्य पालन और पशुपालन को मिली नई मजबूती
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनभागीदारी और ग्रामीण विकास से जोड़कर लागू की जा रही विकसित भारत जी-राम-जी योजना दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में बदलाव की नई मिसाल बन रही है। सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत कालामांजल में इस योजना के सफल क्रियान्वयन से जल संकट दूर हुआ है और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है।

कभी पानी के संकट से जूझता था गांव
कालामांजल गांव में पहले बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था और गर्मी के मौसम में जल स्रोत सूख जाते थे। पेयजल, सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी की भारी समस्या रहती थी। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।
जल संरक्षण से बदली स्थिति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की पहल पर जिला प्रशासन ने गांव में बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम का निर्माण कराया। इन संरचनाओं से वर्षा जल का संरक्षण हुआ, भूजल स्तर बढ़ा और मिट्टी के कटाव पर भी प्रभावी नियंत्रण मिला। साथ ही जंगल से आने वाला मलबा भी जल स्रोतों तक पहुंचने से पहले ही रुकने लगा।

अब सालभर मिल रहा पानी
ग्रामीण मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में पानी की भारी किल्लत रहती थी, लेकिन अब पूरे वर्ष जल स्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है। ग्रामीण इस पानी का उपयोग पेयजल, घरेलू कार्य, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों में कर रहे हैं।
250 से ज्यादा लोगों को मिला रोजगार
ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन सिंह के अनुसार, योजना से केवल जल संरक्षण ही नहीं हुआ बल्कि निर्माण कार्यों के दौरान 250 से अधिक ग्रामीणों को रोजगार भी मिला। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और लोगों की आय में भी वृद्धि हुई।
खेती और आजीविका को मिला नया आधार
जल उपलब्धता बढ़ने से खेती की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब उनका गांव हर मौसम में पानी की उपलब्धता के साथ विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।
