बीजापुर की लख्मी ने योजना की राशि को बचत से जोड़ा, छोटी दुकान से बढ़ी परिवार की आमदनी और बेटे की पढ़ाई का सपना हुआ मजबूत

छत्तीसगढ़ शासन की ‘महतारी वंदन योजना’ और बिहान जैसी आजीविका पहलों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महिला सशक्तिकरण की सोच “बहनों की तरक्की-परिवार की शान” को बीजापुर शहर के भट्टीपारा की रहने वाली 30 वर्षीय लख्मी नाग ने अपनी मेहनत और बचत के जरिए सार्थक किया है।
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता को खर्च करने के बजाय बचत से जोड़कर लख्मी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसी बचत से उन्होंने घर के सामने छोटी-सी किराना दुकान शुरू की, जो अब परिवार की अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है।
महतारी वंदन से मिली आर्थिक मजबूती
लख्मी संयुक्त परिवार में अपनी 65 वर्षीय सास लक्ष्मी नाग और 8 वर्षीय बेटे के साथ रहती हैं। पहले परिवार की आय से घर की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना उनके परिवार के लिए आर्थिक सहारा बनी।
योजना के तहत लख्मी और उनकी सास को प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की सहायता राशि मिल रही है। दोनों ने इस राशि को नियमित रूप से बचाया और इसी बचत से घर के सामने छोटी-सी किराना दुकान शुरू की।
लख्मी बताती हैं कि योजना की राशि ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि खुद का काम शुरू करने का आत्मविश्वास भी दिया। मेहनत के साथ उन्होंने दुकान को परिवार की अतिरिक्त आय का माध्यम बना लिया है।
दुकान में दिख रही बस्तर की संस्कृति
लख्मी और उनकी सास ने दुकान में किराना सामान के साथ महिलाओं की जरूरत की फैंसी सामग्री भी रखना शुरू किया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की परंपरा से जुड़े मिट्टी के गमले और दीये तथा बस्तर की पहचान वाली बांस की टोकनियां भी दुकान में उपलब्ध हैं।
इस तरह दुकान में रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के साथ स्थानीय संस्कृति और हस्तकला की झलक भी देखने को मिलती है।
बेटे की पढ़ाई का सपना भी हो रहा पूरा
लख्मी की आत्मनिर्भरता का सकारात्मक असर उनके परिवार पर भी दिखाई दे रहा है। वह अपने 8 वर्षीय बेटे को बीजापुर के सेंट थॉमस स्कूल में पढ़ा रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होने से बेटे की शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना भी मजबूत हुआ है।
छोटी बचत से बड़ा बदलाव
लख्मी और उनकी सास की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता को यदि मेहनत, बचत और सही सोच के साथ उपयोग किया जाए, तो छोटी-सी मदद भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है।
महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल लख्मी के लिए आत्मनिर्भरता की राह बना है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती से परिवार मजबूत होता है और आत्मनिर्भर महिलाएं समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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