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18 साल से कम उम्र के बच्चों के डिजिटल अकाउंट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई; NGO ने e-KYC और अभिभावक की सहमति अनिवार्य करने की मांग की

नई दिल्ली। 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम याचिका दायर की गई है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में मांग की गई है कि नाबालिगों को सोशल मीडिया अकाउंट उपलब्ध कराने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्या है मांग?
यह याचिका Just Rights for Children Alliance नामक NGO की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि कई लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 13 साल की उम्र में ही बच्चों को अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं, जबकि भारतीय कानून के तहत 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति नाबालिग माना जाता है।
याचिका में इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए बच्चों के डिजिटल इस्तेमाल के लिए अलग और ज्यादा सुरक्षित व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
IT नियमों में बदलाव की मांग
NGO ने सुप्रीम कोर्ट से Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में आवश्यक बदलाव करने या बच्चों के लिए विशेष डिजिटल सुरक्षा गाइडलाइंस तैयार करने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को उनकी उम्र और ऑनलाइन जोखिम के स्तर को ध्यान में रखकर नियंत्रित किया जाना चाहिए।
पैरेंट्स की e-KYC और सहमति हो अनिवार्य
याचिका की प्रमुख मांगों में बच्चों के अकाउंट के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की पहचान की पुष्टि यानी e-KYC को अनिवार्य करना शामिल है।
इसके साथ ही 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म को माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना किसी तरह का अनुबंध करने की अनुमति नहीं देने की मांग की गई है।
जोखिम के आधार पर मिले सोशल मीडिया एक्सेस
याचिका में सुझाव दिया गया है कि नाबालिगों को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल एक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त प्रक्रिया के तहत करने की अनुमति दी जाए।
इसके लिए पहले अभिभावक का वेरिफिकेशन हो और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म या सेवा के जोखिम के स्तर के आधार पर बच्चों के एक्सेस की व्यवस्था तय की जाए।
बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कौन-कौन से खतरे?
याचिकाकर्ता के मुताबिक, बच्चों को बिना निगरानी डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वतंत्र पहुंच मिलने से कई गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। इनमें—
- ऑनलाइन ग्रूमिंग और साइबर बुलिंग
- यौन शोषण और ऑनलाइन तस्करी
- बच्चों के व्यवहार की प्रोफाइलिंग
- निजी डेटा का गलत इस्तेमाल
- उम्र के लिहाज से अनुचित कंटेंट तक पहुंच
जैसे जोखिम शामिल हैं।
अब केंद्र के जवाब पर नजर
सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस मामले में सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी से जुड़े इस मामले में आगे की सुनवाई में कोर्ट की ओर से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।
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