ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन, ‘भारत के रंग’ में दिखी भारतीय संस्कृति की विविधता

रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सातवीं सांस्कृतिक संध्या शास्त्रीय नृत्य की विविध प्रस्तुतियों से सजी रही। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुतियों से मंच को भारतीय शास्त्रीय कला के रंगों से भर दिया।
भाव, लय, ताल और नृत्य मुद्राओं के सुंदर समन्वय ने समारोह में मौजूद दर्शकों को आकर्षित किया।
गणेश वंदना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत ओडिसी नृत्य विभाग के विद्यार्थियों की गणेश वंदना से हुई। विद्यार्थियों ने नृत्य मुद्राओं और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से भगवान गणेश की आराधना प्रस्तुत की।
प्रस्तुति में जया निर्मलकर, सुधा योजन, प्रज्ञा प्रसाद, मीरा वर्मा, दुर्गा प्रसाद, लीना धनकर और रिकी टुडू ने हिस्सा लिया। इसका नृत्य निर्देशन सुशांत कुमार दास ने किया।
‘नृत्यांजलि’ में दिखी भरतनाट्यम की लयकारी
इसके बाद भरतनाट्यम विभाग के विद्यार्थियों ने ‘नृत्यांजलि’ की प्रस्तुति दी। इसमें शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं, मुद्राओं और लयकारी का सुंदर प्रदर्शन किया गया।
लावण्या आनंद द्वारा रचित इस प्रस्तुति का नृत्य संयोजन डॉ. मेदिनी होम्बल और होरिल गौर ने किया। प्रस्तुति में होरिल गौर, प्रीति चौधरी, खुशबू भुमिज, अनुकृति सिंह, अवनि जैन, अदिति शर्मा, अंजलि चौहान और यामिनी निषाद शामिल रहे।
‘भारत के रंग’ ने दिखाई सांस्कृतिक विविधता
सातवीं सांस्कृतिक संध्या की प्रमुख प्रस्तुतियों में ‘भारत के रंग’ ने खास आकर्षण पैदा किया। भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से ‘वंदे मातरम्’ की भावभूमि को मंच पर प्रस्तुत किया गया।
अलग-अलग नृत्य शैलियों की विशिष्ट मुद्राओं और लय के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया गया। इसका नृत्य निर्देशन सुशांत कुमार दास तथा सह-निर्देशन होरिल गौर ने किया।
शिव वंदना में दिखा कथक का आध्यात्मिक सौंदर्य
कार्यक्रम के अगले क्रम में कथक विभाग के शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने स्वर्गीय पंडित बिरजू महाराज द्वारा राग हंसध्वनि और तीनताल में रचित ‘निरतत शंकर पार्वती संग’ पर आधारित शिव वंदना प्रस्तुत की।
कथक की लयकारी, पद संचालन और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य स्वरूप को मंच पर साकार किया गया।
शास्त्रीय कलाओं की परंपरा को मिला मंच
खैरागढ़ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की इन प्रस्तुतियों ने चक्रधर समारोह की सातवीं सांस्कृतिक संध्या को शास्त्रीय नृत्य की विविधता से समृद्ध किया। विद्यार्थियों की साधना, सामूहिक समन्वय और प्रभावी प्रस्तुति के जरिए भारतीय शास्त्रीय कलाओं की जीवंत परंपरा मंच पर दिखाई दी।
