पुनर्वास केंद्र से लेकर 21 साल बाद खुले श्रीराम मंदिर तक पहुंचे दिल्ली के इंफ्लुएंसर्स, ग्रामीणों और पूर्व नक्सलियों से किया संवाद
- 1. बदलते बस्तर की तस्वीर देखने पहुंचे 43 इंफ्लुएंसर्स | सुकमा से पूवर्ती तक किया दौरा
- 2. 21 साल बाद खुले श्रीराम मंदिर में फिर गूंजी पूजा की घंटियां | इंफ्लुएंसर्स ने देखा बदलाव
- 3. पुनर्वास केंद्र से पूवर्ती तक पहुंचा दल | सुरक्षा, विकास और ग्रामीण जीवन को करीब से समझा

सुकमा से शुरू हुआ 13 घंटे का सफर
रायपुर: दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने बस्तर भ्रमण के दौरान सुकमा से जगरगुंडा, केरलापेंदा और पूवर्ती तक का दौरा किया। करीब 13 घंटे से अधिक की इस यात्रा में दल ने सुरक्षा, पुनर्वास, ग्रामीण जीवन, विकास गतिविधियों और क्षेत्र के संघर्षपूर्ण अतीत से जुड़े स्थानों को करीब से देखा। हाल की रिपोर्टों में भी 43 इंफ्लुएंसर्स के बस्तर दौरे की पुष्टि हुई है।
पूर्व नक्सलियों से किया संवाद
सुकमा पुनर्वास केंद्र में इंफ्लुएंसर्स ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से बातचीत की। उन्होंने आत्मसमर्पण के बाद जीवन में आए बदलाव और सामान्य जीवन की ओर लौटने के अनुभवों को समझा।
इसके बाद दल ने सुकमा के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर सुरक्षा, शांति, प्रशासनिक पहुंच और विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी ली। सुकमा साइंस पार्क के भ्रमण के बाद दल तोंगपाल होते हुए जगरगुंडा की ओर रवाना हुआ।
76 जवानों की शहादत से जुड़े क्षेत्र को देखा
जगरगुंडा के रास्ते में दल उस क्षेत्र से गुजरा, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘खूनी सड़क’ के नाम से जाना जाता है। यहां 6 अप्रैल 2010 को ताड़मेटला के पास हुए माओवादी हमले में 62वीं बटालियन सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। सीआरपीएफ के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी 6 अप्रैल 2010 की इस घटना का उल्लेख है।
21 साल बाद फिर खुले श्रीराम मंदिर के कपाट
केरलापेंदा पहुंचकर इंफ्लुएंसर्स ने ग्रामीणों से संवाद किया और गांव में आए बदलावों को समझा। यहां 21 साल तक बंद रहे श्रीराम मंदिर का प्रसंग भी सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, 2003 में माओवादी प्रभाव के दौरान मंदिर में पूजा बंद कर दी गई थी और अप्रैल 2024 में ग्रामीणों तथा सुरक्षा बलों के सहयोग से मंदिर की सफाई के बाद दोबारा पूजा शुरू हुई।
मंदिर में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएं स्थापित हैं। लंबे समय बाद पूजा दोबारा शुरू होना क्षेत्र में सामान्य सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों की वापसी के प्रतीक के रूप में देखा गया।
पूवर्ती में हिडमा के परिवार से मुलाकात
इसके बाद दल कई घंटे की यात्रा कर पूवर्ती पहुंचा। यहां इंफ्लुएंसर्स ने नक्सली कमांडर हिडमा के परिवार के सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने गांव के मौजूदा हालात, स्थानीय जीवन और क्षेत्र में आए बदलावों के बारे में जानकारी ली।
पूरे दौरे में पुनर्वास केंद्र, सुरक्षा व्यवस्था, शहादत से जुड़ी स्मृतियां, ग्रामीण संवाद और मंदिर में लौटती पूजा जैसे अलग-अलग पहलू सामने आए। इंफ्लुएंसर्स के इस दौरे ने बस्तर को उसके संघर्षपूर्ण अतीत के साथ-साथ वर्तमान में हो रहे सामाजिक और विकास संबंधी बदलावों के संदर्भ में देखने का अवसर दिया।
