पण्डो जनजाति की भूमि को गैर-आदिवासी के नाम फर्जी तरीके से बेचने के मामले में कार्रवाई | आरोपी को न्यायालय ने रिमांड पर भेजा
- 1. रायगढ़ में फर्जी जमीन बिक्री मामले में आरोपी गिरफ्तार
- 2. पण्डो जनजाति की भूमि के फर्जी दस्तावेजों की जांच, कापू पुलिस की कार्रवाई
- 3. कोरबा में छिपकर रह रहा था आरोपी, पुलिस ने हिरासत में लेकर भेजा न्यायिक रिमांड

ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत गिरफ्तारी
रायगढ़: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में फर्जीवाड़ा और भूमि संबंधी अपराधों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत कापू पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया, उम्र 50 वर्ष, निवासी बकालो को कोरबा से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया गया।
पूछताछ और विवेचना में भूमि की कथित फर्जी खरीदी-बिक्री में उसकी संलिप्तता सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।
पण्डो जनजाति की भूमि से जुड़ा है मामला
कापू पुलिस ग्राम डुमरनारा की खसरा नंबर 409 की भूमि सहित अन्य भूमि संबंधी फर्जीवाड़े की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, यह भूमि पहले पण्डो जनजाति के सदस्यों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी।
वर्ष 2023-24 के राजस्व अभिलेखों की जांच में बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के भूमि को सुखन पिता बजरंग, जाति रावत के नाम दर्ज किया जाना पाया गया। इसके बाद 21 फरवरी 2024 को भूमि का पंजीकृत विक्रय पत्र संतोष देवी गुप्ता, निवासी रायपुर के नाम किया गया।
फर्जी पहचान और आधार कार्ड के इस्तेमाल का आरोप
जांच में पुलिस को पता चला कि विक्रेता के रूप में प्रस्तुत व्यक्ति का वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम, जाति कंवर है। दस्तावेजों के सत्यापन में कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड के उपयोग की बात सामने आई।
पुलिस के अनुसार, तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका भी जांच में सामने आई है। मामले में पटवारी राकेश कुमार साय और रजिस्ट्री के गवाह अगस्तुस खलखो की गिरफ्तारी के बाद अन्य आरोपियों की तलाश तेज की गई थी।
तमिलनाडु से कोरबा तक बदलता रहा ठिकाना
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए सुखन राठिया पहले तमिलनाडु फरार हो गया था। बाद में पुलिस की तलाश की जानकारी मिलने पर उसने कोरबा में ठिकाना बना लिया। कापू पुलिस ने तलाश के दौरान उसे कोरबा से हिरासत में लिया।
₹10 हजार देने की बात सामने आई
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने अपना वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया बताया। आरोपी के कथित बयान के अनुसार, तत्कालीन पटवारी राकेश साय और अन्य आरोपियों ने उसका नाम सुखन पिता बजरंग रावत दर्शाकर जमीन की रजिस्ट्री कराई थी और इसके एवज में उसे ₹10 हजार दिए गए थे।
7 जुलाई 2026 को तहसीलदार कापू की रिपोर्ट पर थाना कापू में अपराध क्रमांक 108/2026 दर्ज किया गया था। मामले में धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120(बी) भादवि के तहत जांच की जा रही है।
पुलिस टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन और एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के सुपरविजन में की गई। आरोपी की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी कापू निरीक्षक धर्माराम तिर्की सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
