बिलासपुर समेत कई शहरों में धरना | पेंशनरों ने सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक पुरानी व्यवस्था जारी रखने की मांग उठाई
- 1. पेंशन बंद होने के विरोध में बिलासपुर समेत कई शहरों में धरना
- 2. 400 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापक-कर्मचारी प्रभावित होने का दावा
- 3. सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक पेंशन भुगतान जारी रखने की मांग उठी

पेंशन बंद होने के विरोध में प्रदर्शन
बिलासपुर: शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन को लेकर विवाद सामने आया है। बिलासपुर के सीएमडी और डीपी विप्र कॉलेज समेत रायपुर, दुर्ग, भिलाई और अंबिकापुर में पेंशनरों ने धरना देकर भुगतान बहाल करने की मांग की है। पेंशनरों का कहना है कि विभागीय आदेशों के बाद पहले से मिल रही पेंशन प्रभावित हुई है।
सितंबर 2026 में जारी आदेशों के बाद 400 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पेंशन प्रभावित होने का दावा पेंशनर संघ ने किया है।
कैबिनेट के फैसले की अलग-अलग व्याख्या का आरोप
पेंशनरों के अनुसार, 22 जुलाई 2026 की मंत्रिपरिषद बैठक में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सेवानिवृत्ति के समय के वेतनमान के आधार पर पेंशन और उपादान देने संबंधी प्रस्ताव रखा गया था। उनका कहना है कि प्रस्ताव को नियमों में प्रावधान नहीं होने और लोकहित में नहीं होने के आधार पर स्वीकार नहीं किया गया।
पेंशनरों का आरोप है कि इसके बाद विभागीय स्तर पर फैसले की ऐसी व्याख्या की गई, जिससे पहले से मिल रही पेंशन भी बंद हो गई। उनका कहना है कि कैबिनेट ने केवल नए या संशोधित वेतनमान के आधार पर पेंशन देने के प्रस्ताव को अस्वीकार किया था, पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया था।
400 से अधिक पेंशनरों के प्रभावित होने का दावा
अशासकीय अनुदान प्राप्त सेवानिवृत्त प्राध्यापक संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, सितंबर में जारी विभागीय आदेशों के बाद 400 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापक और कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। संघ का कहना है कि पेंशन बंद होने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने आर्थिक कठिनाई पैदा हुई है।
पेंशन व्यवस्था और न्यायिक विवाद
पेंशनरों के अनुसार, अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों में लंबे समय से अंशदायी भविष्य निधि के आधार पर पेंशन व्यवस्था संचालित रही है। वेतन से निर्धारित अंशदान काटकर पेंशन निधि में जमा किया जाता रहा और बाद में वेतनमान के आधार पर पेंशन का भुगतान होता रहा।
पेंशन और संशोधित वेतनमान से जुड़े मामलों में सीएमडी कॉलेज, डीपी विप्र कॉलेज और अन्य अनुदान प्राप्त निजी महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की याचिकाएं छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंची हैं। न्यायिक रिकॉर्ड में इन महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों से जुड़े पेंशन विवाद का उल्लेख है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक भुगतान की मांग
पेंशनरों ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम निर्णय आने तक पहले से मिल रही पेंशन जारी रखी जाए। इसके साथ ही जून 2026 से रोकी गई पेंशन का भुगतान करने और पेंशन बंद करने संबंधी विभागीय आदेश वापस लेने की मांग भी की गई है।
