दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों पर धक्का-मुक्की, धमकी और पत्रकारों को हिरासत में लेने के आरोप; IJU और पंजाब-चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग उठाई
प्रेस क्लब से जुड़े घटनाक्रम पर पत्रकार संगठनों का विरोध
डेराबस्सी: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से जुड़े घटनाक्रम को लेकर पत्रकार संगठनों ने विरोध जताया है। इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU) और पंजाब एवं चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन (PCJU) ने दिल्ली पुलिस तथा सुरक्षा बलों पर पत्रकारों के साथ कथित धक्का-मुक्की, खींचतान, धमकी और हिरासत में लिए जाने के आरोप लगाए हैं। संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
IJU ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील भी की है।
पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप

IJU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलविंदर जम्मू और महासचिव डी. सोमासुंदर के अनुसार, दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा कर्मियों ने कथित तौर पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रवेश कर वहां मौजूद पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और खींचतान की। संगठन ने कुछ पत्रकारों को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर ले जाने का आरोप भी लगाया है।
पत्रकार संगठनों का यह भी दावा है कि प्रेस क्लब के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और बाहर मौजूद पत्रकारों को घेरकर धमकियां दी गईं। संगठनों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने की मांग की है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा
पत्रकार संगठनों ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। पत्रकार जनता के सवाल प्रशासन तक पहुंचाते हैं और सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को सामने लाते हैं। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा और उनके पेशेवर अधिकारों का सम्मान किया जाना जरूरी है।
संगठनों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन किसी भी कार्रवाई में कानून और नागरिकों के वैधानिक अधिकारों का पालन होना चाहिए। कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों पर पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आपातकाल का जिक्र कर जताई चिंता
IJU के नेताओं ने घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया। संगठन ने चिंता जताई कि पत्रकारों को अपना काम करते समय भय, दबाव या कथित धमकियों का सामना नहीं करना चाहिए।
पत्रकार संगठनों के अनुसार, प्रेस की स्वतंत्रता केवल मीडिया संस्थानों का मुद्दा नहीं, बल्कि नागरिकों तक स्वतंत्र और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने से भी जुड़ी है।
पंजाब एवं चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन ने भी जताया विरोध
पंजाब एवं चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन ने भी कथित कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। यूनियन के प्रांतीय चेयरमैन बलबीर जंडू, अध्यक्ष जय सिंह छिब्बर, महासचिव संतोष गिल और सचिव सरबजीत सिंह भट्टी ने पत्रकारों को हिरासत में लेने, प्रेस क्लब के गेट बंद करने और कथित धक्का-मुक्की की निंदा की।
यूनियन ने पंजाब की सभी जिला इकाइयों से इस घटनाक्रम के विरोध में आवाज उठाने और दिल्ली के पत्रकारों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने का आह्वान किया है।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
IJU ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील करते हुए पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने और प्रेस क्लब में कथित कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा कानून का उल्लंघन अथवा अधिकारों का दुरुपयोग सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल मामले में आरोपों की आधिकारिक पुष्टि, संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। पत्रकार संगठनों ने प्रेस की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा और कानून के अनुसार जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
