राजनांदगांव के स्कूल में आखिर क्या हुआ? छात्रा की शिकायत पर शिक्षक गिरफ्तार, दूसरे आरोपी की तलाश
गैंदाटोला के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्राओं से कथित गलत व्यवहार का मामला, पुलिस ने शिक्षक तिलक यदु पर POCSO और एसटी-एससी एक्ट के तहत कार्रवाई की

राजनांदगांव। गैंदाटोला स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्राओं के साथ कथित छेड़खानी और गलत व्यवहार के मामले में पुलिस ने शिक्षक तिलक यदु को गिरफ्तार किया है। छात्रा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ POCSO एक्ट और एसटी-एससी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में रमीज कुरैशी को भी सह-आरोपित बनाया गया है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।
चार दिन तक चलता रहा समझौते का प्रयास
पुलिस के मुताबिक, एक आदिवासी छात्रा की शिकायत सामने आने के बाद मामले को लेकर करीब चार दिनों तक समझौता कराने और मान-मनौव्वल का प्रयास चलता रहा। आरोप है कि शिक्षक की ओर से माफी मांगकर भविष्य में दोबारा ऐसी हरकत नहीं करने का भरोसा दिलाया गया।
हालांकि, छात्रा कार्रवाई की मांग पर अड़ी रही। इसके बाद शुक्रवार देर रात पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की।
परीक्षा में पास कराने का झांसा देने का आरोप
दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपित शिक्षक लंबे समय से इसी स्कूल में पदस्थ है और हिंदी तथा सामाजिक विज्ञान पढ़ाता है। पुलिस के मुताबिक, छात्रा जब करीब तीन साल पहले कक्षा नौवीं में पढ़ती थी, तब भी उसे रमीज कुरैशी के माध्यम से परीक्षा में पास कराने के नाम पर संबंध बनाने का संदेश भेजे जाने का आरोप है।
इंटरनेट मीडिया के जरिए भी इस तरह के संदेश भेजे जाने की बात शिकायत में सामने आई है। पुलिस अब मामले से जुड़े साक्ष्यों और आरोपों की जांच कर रही है।
छात्राओं के परेशान होने की बात आई सामने
मामले की जानकारी क्षेत्र की महिलाओं तक पहुंचने के बाद उन्होंने छात्राओं के पक्ष में पुलिस से शिकायत करने का निर्णय लिया। एक सितंबर को गैंदाटोला थाने में शिक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत दिए जाने की बात सामने आई है।
शिकायत के बाद मामले को लेकर पुलिस स्तर पर जांच आगे बढ़ी और शुक्रवार को छात्रा को जिला मुख्यालय लाकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई।
शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप
शिकायत की जानकारी आरोपित शिक्षक तक पहुंचने के बाद छात्रा और उसे थाने लेकर जाने वाली महिलाओं पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया है।
महिलाओं ने जिला मुख्यालय पहुंचकर एएसपी कीर्तन राठौर को मामले की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर मुख्य आरोपित शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया।
मामले में सह-आरोपित बनाया गया रमीज कुरैशी गैंदाटोला के पूर्व सरपंच खलील अहमद कुरैशी का बेटा बताया गया है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
शिक्षक गिरफ्तार, दूसरे आरोपी की तलाश
पुलिस ने छात्रा की शिकायत के आधार पर शिक्षक तिलक यदु और उसके सहयोगी के खिलाफ संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया है। मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि सह-आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है।
पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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रायपुर से विशाखापट्टनम का सफर बदलेगा? 465 किमी का नया कॉरिडोर खोल देगा विकास का रास्ता
597 किमी की मौजूदा दूरी घटकर 465 किमी होने की उम्मीद, बस्तर-कांकेर-कोंडागांव से होकर विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंचेगा 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर

रायपुर। देश में बन रहे कई बड़े एक्सप्रेसवे के बीच रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर को मध्य भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। करीब 465 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर और कोंडागांव क्षेत्रों को ओडिशा के नवरंगपुर और कोरापुट से जोड़ते हुए आंध्र प्रदेश के रास्ते सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंच बनाएगा।
इस कॉरिडोर से केवल रायपुर और विशाखापट्टनम के बीच यात्रा आसान होने की उम्मीद नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के समुद्र से दूर क्षेत्रों के लिए व्यापार और माल परिवहन का नया रास्ता भी तैयार होगा।
597 से घटकर 465 किमी रह जाएगी दूरी?
फिलहाल रायपुर से विशाखापट्टनम की दूरी करीब 597 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से सफर में लगभग 13 से 14 घंटे लग सकते हैं। नए 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तैयार होने के बाद दूरी घटकर करीब 465 किलोमीटर होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही यात्रा का समय भी लगभग 5 से 6 घंटे तक आने का अनुमान है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 16,482 करोड़ से 20,000 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल यानी HAM के तहत कई पैकेजों में किया जा रहा है। परियोजना को दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य बताया गया है।
बस्तर के महुआ-इमली से लेकर हस्तशिल्प तक को मिलेगा बाजार
कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा वनांचल और अपेक्षाकृत दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजर रहा है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से महुआ, इमली, धान और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है।
रायपुर और विशाखापट्टनम जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों से कनेक्टिविटी बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों की बिक्री और परिवहन को गति मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
घने जंगलों के बीच बन रही 2.83 किमी की ट्विन टनल
इस परियोजना की इंजीनियरिंग विशेषताओं में 2.83 किलोमीटर लंबी 6-लेन ट्विन टनल प्रमुख है। यह सुरंग कोंडागांव और कांकेर के बीच पहाड़ी और वन क्षेत्र में बनाई जा रही है।
इसके अलावा ओडिशा सीमा के आसपास पहाड़ी और घाटी वाले इलाकों में सड़क निर्माण के लिए करीब 1.8 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वियाडक्ट भी बनाया गया है। इसका उद्देश्य कठिन भू-भाग में सड़क कनेक्टिविटी विकसित करना है।
वन्यजीवों के लिए भी किए जा रहे विशेष इंतजाम
कॉरिडोर का कुछ हिस्सा संवेदनशील वन और वन्यजीव क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए वाइल्डलाइफ अंडरपास, ओवरपास और साउंड बैरियर जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित/निर्मित की जा रही हैं।
बताया गया है कि मार्ग में 27 से अधिक वन्यजीव क्रॉसिंग और संबंधित संरचनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि सड़क के कारण वन्यजीवों की आवाजाही पर कम से कम असर पड़े और वाहनों के शोर को भी नियंत्रित किया जा सके।
विशाखापट्टनम पोर्ट से जुड़ने का क्या होगा फायदा?
छत्तीसगढ़ समुद्र सीमा से रहित राज्य है। ऐसे में विशाखापट्टनम पोर्ट तक तेज और सुगम सड़क कनेक्टिविटी राज्य के लिए व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है।
कॉरिडोर के चालू होने के बाद खनिज, कृषि उत्पाद और औद्योगिक सामान बंदरगाह तक कम समय में पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटने और निर्यात के नए अवसर बनने की संभावना है।
अगर परियोजना तय लक्ष्य के अनुसार दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू होती है, तो रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच कनेक्टिविटी के साथ-साथ बस्तर और आसपास के क्षेत्रों के व्यापारिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ में बड़ा सम्मान, 63 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार; 64 नामों का ऐलान
लोकभवन में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उत्कृष्ट शिक्षकों को किया सम्मानित, AI और नई तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल पर दिया जोर

रायपुर, 5 सितंबर 2026। शिक्षक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के सम्मान का राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम् में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया।
समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं चार उत्कृष्ट शिक्षकों को अलग-अलग श्रेणियों में राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा भी की।
AI के दौर में शिक्षक की भूमिका पर राज्यपाल का संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका भी लगातार बदल रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना जरूरी है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि AI हमारा सहायक बने, नियंत्रक नहीं। शिक्षकों को विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और व्यक्तित्व विकास के लिए करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
तकनीक जानकारी दे सकती है, संस्कार शिक्षक ही देते हैं
राज्यपाल ने कहा कि गूगल और डिजिटल माध्यमों के जरिए आज सूचनाओं का विशाल संसार हमारे सामने उपलब्ध है। लेकिन तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास प्रभावित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकनीक जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
शिक्षकों को लगातार अपडेट करना होगा अपना ज्ञान
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में काम हो रहा है।
उन्होंने शिक्षकों से अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अपडेट करने की अपील की। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देने तथा उनकी काउंसलिंग को भी शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।
मुख्यमंत्री बोले- शिक्षक राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता
समारोह की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान शिक्षकों के समर्पण, मेहनत, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है।
मुख्यमंत्री ने भारत रत्न एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा बेहद समृद्ध रही है। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं होने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की भाषायी और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए स्थानीय जरूरतों को भी शिक्षा व्यवस्था में महत्व दिया जा रहा है।
बस्तर में स्थानीय बोली से पढ़ाई पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
341 स्कूल PM श्री योजना में चयनित
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।
ओरछा और जगरगुंडा में बनेगी एजुकेशन सिटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लक्ष्य में शिक्षा विभाग और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
AI आधारित स्मार्ट स्कूलों पर भी जोर
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने के लिए भी विभिन्न गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा की।
चार शिक्षकों को मिला विशेष स्मृति पुरस्कार
राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए।
- राजेश कुमार प्रजापति, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई — डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार
- कामता प्रसाद जायसवाल, कोरबा — डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार
- प्रज्ञा सिंह, दुर्ग — डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार
- प्रियंका गोस्वामी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ — श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार
इसके अलावा प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक और सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी, उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, विशेष सचिव संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी और प्रदेशभर से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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13 साल बाद झीरम घाटी कांड में आया फैसला, 10 आरोपी दोषी; अब सजा पर टिकी निगाहें
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल

जगदलपुर, 5 सितंबर 2026। बहुचर्चित झीरम घाटी कांड में करीब 13 साल बाद विशेष एनआईए अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने मामले में नामजद सभी 10 आरोपियों को दोषी पाया है। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं।
अदालत का यह फैसला लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद आया है। झीरम घाटी कांड को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ की निगाहें इस फैसले पर टिकी थीं। अब दोषसिद्धि के बाद अदालत द्वारा दोषियों को सुनाई जाने वाली सजा पर नजर रहेगी।
27 लोगों की हत्या और 15 की हत्या के प्रयास का मामला
मामले में 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को इन आरोपों से जुड़े मामले में दोषी ठहराया है।
फैसले के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में दोषियों की सजा निर्धारित की जाएगी। अदालत के निर्णय से झीरम घाटी मामले की लंबे समय से चली आ रही न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है।
10 दोषियों में तीन महिलाएं भी
इस मामले में दोषी पाए गए 10 आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। अदालत के फैसले के बाद अब सभी दोषियों के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दोषसिद्धि के बाद सजा को लेकर अदालत की अगली प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी पर अब पीड़ित परिवारों और पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के काफिले पर बड़ा नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और वर्षों तक सुनवाई चलती रही।
13 साल बाद आया फैसला
झीरम घाटी कांड को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और चर्चित नक्सली हमलों में गिना जाता है। करीब 13 साल बाद विशेष NIA अदालत का फैसला आने से मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अहम मोड़ आया है।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को अदालत क्या सजा सुनाती है। सजा को लेकर आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
