रायगढ़ में तेज रफ्तार एंबुलेंस मेडिकल स्टोर में घुसी, बाल-बाल टला बड़ा हादसा; चालक पर नशे में होने का आरोप
मेडिकल कॉलेज रोड पर आधी रात करीब 12 बजे हुआ हादसा, खंभे से टकराने के बाद दुकान के सामने घुसी एंबुलेंस; कोई जनहानि नहीं

रायगढ़। शहर में बीती रात एक तेज रफ्तार एंबुलेंस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित मेडिकल स्टोर के बाहर जा घुसी। हादसा मेडिकल कॉलेज रोड पर पेट्रोल पंप के पास देर रात करीब 12 बजे हुआ। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मेडिकल स्टोर के सामने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और मौके पर मलबा बिखर गया।
तेज रफ्तार में थी एंबुलेंस
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एंबुलेंस तेज गति से आ रही थी। पेट्रोल पंप के पास पहुंचने के बाद चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और एंबुलेंस सड़क किनारे लगे खंभे से टकराने के बाद मेडिकल स्टोर के सामने जा घुसी।
टक्कर के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
चालक के नशे में होने की चर्चा
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस चालक के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि चालक कथित तौर पर शराब के नशे में था और ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।
हालांकि, चालक के शराब के नशे में होने की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसकी पुष्टि मेडिकल जांच या पुलिस कार्रवाई के बाद ही हो सकेगी।
गनीमत रही, नहीं हुई जनहानि
हादसा देर रात हुआ, जिसके चलते मेडिकल स्टोर के आसपास उस समय ज्यादा भीड़ नहीं थी। यही वजह रही कि इस दुर्घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं है।
हालांकि, जिस तरह एंबुलेंस अनियंत्रित होकर दुकान में घुसी, उससे बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। घटना ने निजी एंबुलेंसों की गति, चालकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निजी एंबुलेंसों की निगरानी पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निजी एंबुलेंस चालकों की फिटनेस, ड्राइविंग व्यवहार और वाहन संचालन की नियमित जांच होनी चाहिए। आपातकालीन सेवा से जुड़े वाहनों को तेज गति से चलाने की अनुमति होती है, लेकिन इससे सड़क सुरक्षा के नियमों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल हादसे के कारणों और चालक की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
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दिल्ली के सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, बारिश के बीच बहुमंजिला इमारत ढही; मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका
मोती बाग के पास सत्य निकेतन इलाके में दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा, पुलिस-दमकल और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटीं

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी इलाके के सत्य निकेतन में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। मोती बाग के पास शिव मंदिर के नजदीक एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत गिरने की घटना दोपहर करीब 1:30 बजे हुई। इलाके में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। प्रारंभिक तौर पर बारिश के कारण इमारत के ढांचे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इमारत के अचानक गिरने से आसपास धूल का गुबार छा गया और लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए।
दमकल और पुलिस की टीमें राहत कार्य में जुटीं
हादसे के बाद दिल्ली फायर सर्विस की कई गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जेसीबी और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक-दो लोगों को मलबे से बाहर निकाले जाने की बात सामने आई है, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में रहते हैं छात्र
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और किराए के कमरों में रहते हैं। ऐसे में इमारत के मलबे में छात्रों या वहां काम करने वाले मजदूरों के फंसे होने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय स्तर पर यह भी जानकारी सामने आई है कि इमारत में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हादसे के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बना दिया है। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान लोगों को मलबे से दूर रखा जा रहा है, ताकि रेस्क्यू टीम को काम करने में परेशानी न हो।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मृतकों या घायलों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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झीरम घाटी कांड में 13 साल बाद फिर उठे सवाल, देवजी और देवा पर ट्रायल क्यों नहीं चला?
NIA की वांछित सूची में रहे माओवादी नेताओं की भूमिका को लेकर उठे सवाल, कांग्रेस ने जांच पर सवाल उठाते हुए नार्को टेस्ट की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के करीब 13 साल बाद अदालत के फैसले के बीच मामले की जांच और ट्रायल को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। झीरम हमले के मास्टरमाइंड बताए जाने वाले तिमिरी तिरूपति उर्फ देवजी और प्रमुख कमांडर बारसे सुक्का उर्फ देवा के नाम जांच के दौरान सामने आते रहे, लेकिन अदालत में चले ट्रायल में इन दोनों के खिलाफ मुकदमा नहीं चला।
11 माओवादियों के खिलाफ चला ट्रायल
झीरम कांड मामले में कुल 11 आरोपित माओवादियों के खिलाफ ट्रायल चला। इनमें से एक की मौत हो चुकी है। इसके बाद जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने हाल ही में 10 आरोपितों को दोषी करार दिया।
हालांकि, हमले की साजिश और घटनाक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका बताए जाने वाले कुछ बड़े माओवादी नेताओं को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। इनमें देवजी और देवा के नाम प्रमुख हैं। सवाल यह है कि जब ये नाम जांच के दौरान सामने आते रहे, तो इनके खिलाफ अदालत में मुकदमा क्यों नहीं चला।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ पर भी सवाल
मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि देवजी और देवा समेत कुछ ऐसे वांछित माओवादी बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनका नाम झीरम हमले की जांच से जुड़ा रहा।
आलोचकों का कहना है कि आत्मसमर्पण के बाद ऐसे लोगों से पूछताछ की जाती तो हमले की साजिश, माओवादी संगठन की भूमिका और वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती थी। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से पूछताछ न किए जाने के कारणों को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने NIA जांच पर उठाए सवाल
अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि हमले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए जांच के सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल जरूरी है।
कांग्रेस ने मामले को लेकर उच्च न्यायालय का रुख करने के संकेत भी दिए हैं। पार्टी का आरोप है कि झीरम हमले के पीछे की पूरी साजिश का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है।
नार्को टेस्ट की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, तत्कालीन गृह मंत्री ननकी राम कंवर, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी और आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों का नार्को टेस्ट कराने की मांग उठाई है।
दीपक बैज का कहना है कि झीरम घाटी हमला केवल माओवादी हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक षड्यंत्र और हत्या का पहलू भी है। कांग्रेस का दावा है कि संबंधित तत्कालीन अधिकारियों और आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से वैज्ञानिक तरीके से पूछताछ होने पर घटना से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
कांग्रेस ने नार्को टेस्ट की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी की बात कही है।
क्या आत्मसमर्पण के बाद भी हो सकती थी पूछताछ?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति के आत्मसमर्पण करने के बाद भी जांच एजेंसी उससे मामले से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए पूछताछ कर सकती है, बशर्ते यह कानूनी प्रक्रिया और संबंधित नियमों के तहत हो। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि झीरम मामले में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से कितनी और किस स्तर पर पूछताछ की गई।
झीरम घाटी हमले से जुड़े कई सवाल आज भी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा हैं। अब 13 साल बाद अदालत के फैसले के बाद जांच के उन पहलुओं पर भी चर्चा तेज हो गई है, जो ट्रायल का हिस्सा नहीं बन सके।
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कॉलेज में 75% से कम उपस्थिति पर अभिभावकों को जाएगा फोन या मैसेज, सत्र 2026-27 से नई व्यवस्था
उच्च शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक कैलेंडर के साथ लागू की व्यवस्था, नियमित कक्षाओं से विद्यार्थियों को जोड़ने और पढ़ाई के प्रति गंभीरता बढ़ाने पर जोर

भिलाई : कॉलेजों में अब विद्यार्थियों की उपस्थिति केवल हाजिरी रजिस्टर तक सीमित नहीं रहेगी। सत्र 2026-27 से 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को फोन या संदेश के जरिए सूचना दी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक कैलेंडर के साथ यह व्यवस्था लागू की है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं से जोड़ना और प्रवेश लेने के बाद पढ़ाई के प्रति उनकी गंभीरता बढ़ाना है। कई विद्यार्थी प्रवेश के बाद नियमित कक्षाओं से दूरी बना लेते हैं और परीक्षा के समय ही पढ़ाई पर ध्यान देते हैं। अब कम उपस्थिति की जानकारी अभिभावकों तक पहुंचने से घर से भी विद्यार्थियों की कॉलेज उपस्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।
पढ़ाई और व्यावहारिक ज्ञान पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत स्नातक स्तर पर कौशल विकास, शोध और व्यावहारिक ज्ञान को पाठ्यक्रम में अधिक महत्व दिया जा रहा है। आंतरिक परीक्षाओं, प्रायोगिक कार्य और अंतिम परीक्षाओं का आयोजन भी नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार किया जाएगा।
नियमित कक्षाओं में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ने से पढ़ाई के साथ-साथ उनके कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को भी बेहतर करने पर जोर रहेगा।
प्रतियोगी परीक्षा और नौकरी करने वाले छात्रों के लिए चुनौती
75 प्रतिशत उपस्थिति का नियम नियमित रूप से कॉलेज आने वाले विद्यार्थियों के लिए मुश्किल नहीं होगा। हालांकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले या नौकरी के साथ पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए कॉलेज और अन्य जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी भी हैं जो कॉलेज पहुंचने के बावजूद कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते। ऐसे विद्यार्थियों की कम उपस्थिति होने पर अब उनके अभिभावकों को भी इसकी जानकारी मिल सकेगी।
कॉलेजों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
उपस्थिति को लेकर अलर्ट व्यवस्था लागू होने के साथ कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं से जोड़ने के लिए शिक्षकों की समय पर मौजूदगी और कक्षाओं का नियमित संचालन जरूरी होगा।
इसके साथ ही पढ़ाई को रोजगार और व्यावहारिक जरूरतों से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी बनाने पर भी जोर देना होगा।
क्षेत्रीय अपर संचालक डॉ. अनुपमा अस्थाना के अनुसार, सभी कॉलेजों में पढ़ाई शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार जारी है। विद्यार्थियों को नियमित रूप से सभी कक्षाओं में उपस्थित होना चाहिए। उनकी पढ़ाई के लिए जरूरी व्यवस्थाएं शासन स्तर पर की गई हैं।
