रायपुर, 28 जून। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। सरकार की उच्चस्तरीय समिति अब गोवा और उत्तराखंड में लागू यूसीसी मॉडल का विस्तृत अध्ययन करेगी। साथ ही गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों के अनुभवों और सुझावों का भी विश्लेषण किया जाएगा।

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🔴छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज
🔴गोवा और उत्तराखंड मॉडल का करेगी अध्ययन समिति
🔴आदिवासी समुदाय को विशेष छूट पर भी होगा विचार
🔴विवाह, तलाक और संपत्ति कानूनों का होगा विश्लेषण
🔴यूसीसी को लेकर प्रदेश में सियासत भी तेज
सरकार का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर लागू प्रावधानों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ के लिए उपयुक्त मसौदा तैयार करना है। गोवा और उत्तराखंड में लागू कई प्रावधानों में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों के अधिकार, विवाह पंजीकरण और संपत्ति संबंधी नियम भी शामिल हैं।
वहीं, इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि यूसीसी देश के लिए एक जटिल विषय है और सरकार राजनीतिक कारणों से इसे आगे बढ़ा रही है।
इधर, राज्य की बड़ी आदिवासी आबादी को देखते हुए सरकार विशेष सावधानी बरत रही है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ की 30.62 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति वर्ग से है। ऐसे में संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासी समाज की परंपराओं और प्रथागत कानूनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें यूसीसी से आंशिक या पूर्ण छूट देने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अध्ययन रिपोर्ट और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही छत्तीसगढ़ में यूसीसी का अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा।
