बिलासपुर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में एक बार फिर सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल प्रबंधन स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अस्पताल परिसर के कई शौचालयों और पेशाबघरों से उठ रही तेज दुर्गंध मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अस्पताल के भीतर मुंह ढंककर गुजरना पड़ रहा है।

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🔴 सिम्स में सफाई व्यवस्था फेल! शौचालयों की बदबू से मरीज और परिजन बेहाल
🔴 सिम्स की सफाई पर सवाल, शौचालयों की बदबू से मरीज परेशान
🔴 संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में गंदगी का अंबार, मरीजों का सांस लेना मुश्किल
🔴 सिम्स अस्पताल में बदहाल सफाई व्यवस्था, संक्रमण का खतरा बढ़ा
🔴 सिम्स में स्वच्छता के दावों की खुली पोल, बदबू से मरीज परेशान
🔴 सिम्स के शौचालय बने परेशानी की वजह, मरीजों ने उठाए सफाई पर सवाल
अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक, एमआरडी और वार्डों के पास बने शौचालयों की स्थिति सबसे अधिक खराब बताई जा रही है। नियमित सफाई और फिनाइल का उपयोग नहीं होने से गंदगी जमा हो गई है। दुर्गंध के कारण मरीज और उनके परिजन शौचालयों का उपयोग करने से भी बच रहे हैं। वहीं गंदगी और ठहरे पानी की वजह से मच्छरों और मक्खियों का जमावड़ा बढ़ने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि सफाई एजेंसी और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मस्तूरी से आए रमेश कुमार साहू ने बताया कि शौचालयों के पास कुछ मिनट भी खड़ा होना मुश्किल है। वहीं जरहाभाठा निवासी मनीष सिंह का कहना है कि आपातकालीन विभाग के पास भी सफाई नहीं होने से बदबू लगातार बढ़ रही है।
जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सिम्स की व्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिला था, लेकिन अब फिर से सफाई व्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो अस्पताल में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और मरीजों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
