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🔴 जगदलपुर के बाद बिलासपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भी PPP मोड पर देने की तैयारी
🔴 ओपीडी मरीजों को महंगी जांच का उठाना पड़ सकता है खर्च
🔴 आयुष्मान योजना भर्ती के बाद ही लागू, जांच में नहीं मिलती राहत
🔴 लैब और एक्स-रे सेवाओं के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार जगदलपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बाद अब बिलासपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर संचालित करने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्ताव को लेकर मरीजों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर इलाज की लागत और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

ओपीडी मरीजों को महंगी पड़ सकती हैं जांच
जानकारों के अनुसार, PPP मॉडल में भर्ती मरीजों को आयुष्मान योजना का लाभ मिल जाता है, लेकिन ओपीडी में आने वाले मरीजों को जरूरी जांच का खर्च स्वयं उठाना पड़ता है। यदि डॉक्टर सीटी स्कैन, एमआरआई या अन्य जांच लिखते हैं तो मरीजों को 7 हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है।
आयुष्मान योजना भर्ती के बाद ही लागू
बताया जा रहा है कि आयुष्मान कार्ड का कैशलेस लाभ तभी मिलता है जब मरीज अस्पताल में भर्ती हो। ओपीडी में परामर्श के दौरान लिखी गई जांचों का भुगतान मरीजों को अपनी जेब से करना पड़ता है।
जगदलपुर अस्पताल में पहले भी हुआ था विवाद
जगदलपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में निजी एजेंसी द्वारा 700 से 1000 रुपये तक ओपीडी शुल्क लेने पर विवाद हुआ था। बाद में चिकित्सा शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप के बाद निजी एजेंसी को चेतावनी दी गई और ओपीडी शुल्क कम किया गया। हाल ही में वहां हार्ट मरीजों के लिए कैथ लैब सेवा भी शुरू की गई है।
लैब और एक्स-रे सेवाओं के निजीकरण का विरोध
प्रदेश के जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से ब्लड जांच सेवाएं निजी एजेंसी को दिए जाने के बाद अब एक्स-रे सेवाओं के निजीकरण की तैयारी भी विवाद का कारण बन रही है। रेडियोग्राफर और लैब टेक्नीशियन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे नियमित और संविदा भर्ती प्रभावित होगी तथा सरकारी कर्मचारियों के भविष्य पर असर पड़ेगा।
जगदलपुर अस्पताल में उपलब्ध हैं सुपर स्पेशलिटी सेवाएं
जगदलपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 240 बिस्तरों की सुविधा है। यहां कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। अधिकारियों का दावा है कि मरीजों का इलाज सरकारी दरों पर किया जा रहा है, जबकि विशेषज्ञों का सवाल है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सरकारी अस्पताल को PPP मोड पर देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
