शहर के बेसहारा मवेशियों से परेशान किसानों ने अपनाया अनोखा तरीका
| 🔴 13 किलोमीटर तक 50 से अधिक मवेशियों को हांककर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान 🔴 शहर के मवेशियों पर गांवों में फसल बर्बाद करने का आरोप 🔴 कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार के सामने मवेशियों को बैठाकर किसानों ने किया प्रदर्शन 🔴 परसा गांव में करीब 50 एकड़ फसल बर्बाद होने का किसानों ने लगाया आरोप 🔴 किसानों की मांग- बेसहारा मवेशियों के लिए प्रशासन स्थायी व्यवस्था करे |
अंबिकापुर। शहर के बेसहारा मवेशियों से परेशान किसानों ने गुरुवार को अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। ग्राम पंचायत परसा और देवगढ़ के नाराज किसान करीब 13 किलोमीटर तक 50 से अधिक बेसहारा मवेशियों को पैदल हांकते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंच गए। किसानों ने कलेक्टर चैंबर से पहले मुख्य प्रवेश द्वार के सामने ही मवेशियों को बैठा दिया और खुद भी वहीं धरने पर बैठ गए।

कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक बड़ी संख्या में गाय, बैल और बछड़ों के पहुंचने से अधिकारी-कर्मचारी भी हैरान रह गए। किसानों की अगुवाई परसा के सरपंच मनोज सिंह और देवगढ़ के सरपंच सन्यासी कुमार कर रहे थे।
शहर से गांवों में मवेशी छोड़ने का लगाया आरोप
किसानों का आरोप है कि नगर निगम अंबिकापुर क्षेत्र में घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को काऊ कैचर में पकड़कर सुनियोजित तरीके से आसपास के गांवों में छोड़ दिया जाता है। किसानों के मुताबिक, नगर निगम के पास मवेशियों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण यह समस्या लगातार बढ़ रही है।
परसा के किसानों ने बताया कि अकेले उनके गांव में बेसहारा मवेशियों ने करीब 50 एकड़ फसल बर्बाद कर दी है। किसानों का कहना है कि जब उन्होंने जानकारी जुटाई तो पता चला कि फसल बर्बाद करने वाले मवेशियों में से कोई भी गांव के लोगों का नहीं है।
🔴 गांव-गांव में बढ़ रही परेशानी
किसानों ने बताया कि समस्या सिर्फ परसा गांव तक सीमित नहीं है। देवगढ़, रजपुरी, करमहा, हसूली, भकुरा, नवापारा, खैरबार, श्रीगढ़ और नवागढ़ सहित शहर से लगे कई गांवों में बेसहारा मवेशियों के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शहर से मवेशियों को गांवों में छोड़ दिए जाने से उनकी खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। वहीं अंबिकापुर शहर की सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी मवेशियों के जमावड़े से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
🔴 किसानों ने कहा- व्यवस्था नहीं हुई तो रोज आएंगे कलेक्ट्रेट
किसानों का कहना है कि अंबिकापुर नगर निगम के पास कांजी हाउस तो है, लेकिन उसकी क्षमता सीमित है। इसके अलावा बेसहारा मवेशियों को रखने के लिए कोई पर्याप्त स्थायी व्यवस्था नहीं है।
किसानों ने बताया कि सीतापुर के सोनतराई में गोधाम की स्वीकृति मिली है, लेकिन उसका संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है। वहीं पहले संचालित गौठान भी बंद हो चुके हैं।
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बेसहारा मवेशियों के लिए तत्काल समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही ऐसे पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जो अपने मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं।
किसानों ने स्पष्ट कहा कि अब प्रशासन को व्यवस्था करनी होगी। या तो बेसहारा मवेशियों के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, या फिर कलेक्ट्रेट में रोज हांककर लाए जाने वाले मवेशियों को रखने की व्यवस्था प्रशासन करे।
