रीजनल साइंस सेंटर में विद्यार्थियों ने जानी भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिकों ने साझा किए अनुभव; पोस्टर प्रतियोगिता में नेहा कोसले रहीं प्रथम

रायपुर। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर रायपुर में विद्यार्थियों और युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भारत की अंतरिक्ष यात्रा, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना रहा। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से साझा किए अंतरिक्ष विज्ञान के अनुभव
कार्यक्रम में इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर एवं रीजनल साइंस सेंटर नागपुर के वैज्ञानिक श्री मिमलिंद चाडोकर, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक-ई श्री एम.के. बेग तथा छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर शामिल हुए।
वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान, भारत के अंतरिक्ष अभियानों और इससे जुड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।
महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने, हमेशा जिज्ञासु बने रहने और विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने चंद्रयान मिशन सहित भारत की प्रमुख अंतरिक्ष उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विकास यात्रा पर चर्चा
कार्यक्रम में श्री मिमलिंद चाडोकर ने ‘इंडियाज स्पेस प्रोग्राम: पास्ट, प्रेजेंट, फ्यूचर’ विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर वर्तमान समय तक की विकास यात्रा के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने देश के अंतरिक्ष अभियानों की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।
छत्तीसगढ़ के विकास में उपग्रह तकनीक की भूमिका
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक-ई श्री एम.के. बेग ने ‘एप्लीकेशन ऑफ सेटेलाइट टेक्नोलॉजी फॉर द डेवलपमेंट ऑफ छत्तीसगढ़’ विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने उपग्रह तकनीक के विभिन्न उपयोगों और छत्तीसगढ़ के विकास में इसकी संभावित भूमिका की जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि सैटेलाइट तकनीक का उपयोग कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और विकास संबंधी गतिविधियों में प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
‘थुम्बा से चंद्रमा और उससे आगे’ पर पोस्टर प्रतियोगिता
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए ‘इंडियाज स्पेस जर्नी: थुम्बा से चंद्रमा और उससे आगे’ विषय पर पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता आयोजित की गई।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा, भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों और सतत विकास में अंतरिक्ष विज्ञान की भूमिका को अपने पोस्टरों के माध्यम से रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के डॉ. त्रिभुवन सिंह, श्री अमित कुमार मेश्राम और डॉ. अमित राम शामिल रहे। निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों के पोस्टरों का मूल्यांकन वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विषय-वस्तु, रचनात्मकता और प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया।
नेहा कोसले ने हासिल किया पहला स्थान
पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए चयन किया गया। विजेता विद्यार्थियों को कार्यक्रम के दौरान प्रमाण-पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
- प्रथम स्थान: बी.पी. पुजारी शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की नेहा कोसले
- द्वितीय स्थान: सावित्री बाई फुले एजुकेशनल एकेडमी की स्नेहा पांडेय
- तृतीय स्थान: पं. गिरिजा शंकर मिश्रा स्कूल की सविता चक्रधारी
इसके अलावा लीना साहू, डेविड चालक और यशिका वर्मा को भी सम्मानित किया गया।
150 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों से आए 150 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं को रचनात्मक तरीके से सामने रखा।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान को केवल एक विषय के रूप में समझने के बजाय उसके सामाजिक, वैज्ञानिक और विकासात्मक महत्व को जानने का अवसर मिला। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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