मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 1 मई से 10 जून तक चला सुशासन तिहार, ग्रामीणों की जरूरतों का मौके पर समाधान और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की हुई समीक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन का सुशासन तिहार जनता और शासन-प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने वाली एक संवेदनशील पहल के रूप में सामने आया है। इसका उद्देश्य गांवों और शहरों तक पहुंचकर आम लोगों की समस्याओं को समझना, उनका समयबद्ध समाधान करना और शासन के प्रति जनविश्वास को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस वर्ष 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में सुशासन तिहार का आयोजन किया गया।
इस अभियान के दौरान मुख्यमंत्री से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और अभियान दलों ने गांवों तक पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद किया। ग्रामीणों ने भी अपने क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों को बेझिझक सामने रखा।
समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रशासन की सहज पहुंच
सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य शासन को लोक-केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। अभियान के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।
बस्तर के आयतु से लेकर सरगुजा के तिहारू और धमतरी के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार जैसे ग्रामीणों को भी अपनी बात सीधे प्रदेश के मुखिया के सामने रखने का अवसर मिला।
ग्रामीणों ने पीडीएस के तहत मिलने वाले खाद्यान्न, पेयजल, सड़क, बिजली, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन, तालाब में घाट निर्माण और स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति जैसी स्थानीय जरूरतों को प्रमुखता से सामने रखा।
गांव, गरीब और किसानों की समस्याओं के समाधान पर जोर
सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर शिविर आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री ने कई स्थानों पर ग्रामीणों की छोटी-छोटी सार्वजनिक जरूरतों को मौके पर ही मंजूरी दी।
भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का ग्रामीणों के बीच अचानक पहुंचना लोगों के लिए खास अनुभव रहा। हेलीकॉप्टर से मुख्यमंत्री के गांव पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने उनसे सहजता से संवाद किया और अपनी समस्याएं बताईं।
इस वर्ष अभियान का विशेष जोर गांव, गरीब और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान पर रहा।
चौपाल में ग्रामीणों से सीधे हुआ संवाद
सुशासन तिहार के दौरान प्रदेश के सभी 33 जिलों और 146 विकासखंडों में अभियान दल गठित किए गए। इन दलों में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
प्रदेश की लगभग 11,693 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले करीब 19,820 गांवों तक अभियान को पहुंचाने का प्रयास किया गया। अधिकारी-कर्मचारियों के दलों ने गांवों का भ्रमण किया और कई स्थानों पर रात रुककर ग्रामीणों के साथ चौपाल में उनकी समस्याएं एवं जरूरतें जानीं।
सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का हुआ मूल्यांकन
अभियान में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। मुख्यमंत्री के साथ जिलों के प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों ने विभिन्न क्षेत्रों का आकस्मिक दौरा कर सुशासन तिहार के संचालन की स्थिति देखी।
इस दौरान सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के जमीनी क्रियान्वयन का भी मूल्यांकन किया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अंत्योदय अन्न योजना, खाद्यान्न भंडारण और वितरण की स्थिति की समीक्षा की गई।
मानसून से पहले पहुंचविहीन क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं के भंडारण तथा बीपीएल परिवारों के लिए अमृत नमक वितरण की स्थिति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई।
मनरेगा मजदूरी से लेकर राजस्व प्रकरणों की समीक्षा
सुशासन तिहार के दौरान महात्मा गांधी नरेगा और अन्य रोजगारमूलक कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें काम कर रहे श्रमिकों को समय पर मजदूरी भुगतान की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया।
इसके अलावा अविवादित नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति भी देखी गई। प्रशासन ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े मामलों के समयबद्ध समाधान पर जोर दिया।
पेयजल, बिजली और स्वच्छता व्यवस्था पर भी फोकस
गांवों में पेयजल व्यवस्था और जलस्रोतों की साफ-सफाई की स्थिति की जानकारी ली गई। संपूर्ण स्वच्छता अभियान और निर्मल ग्राम योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।
विद्युत व्यवस्था, ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों के रखरखाव, कृषि पंपों के विद्युतीकरण तथा एकल बत्ती कनेक्शन से जुड़े कार्यों की प्रगति भी अभियान के दौरान जांची गई।
स्वास्थ्य, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी समीक्षा
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति को भी सुशासन तिहार के दौरान प्राथमिकता दी गई। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पेंशन, निराश्रित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार ने योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनके वास्तविक लाभ को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया। गांवों में सीधे पहुंचकर समस्याएं सुनने और मौके पर समाधान की प्रक्रिया ने शासन और जनता के बीच संवाद को और मजबूत किया।
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