सुकमा के माओवादी पुनर्वास केंद्र से आईं युवतियों ने रायपुर में प्रोफेशनल मॉडल्स के साथ किया रैंप वॉक

रायपुर। जंगल की पगडंडियों से रैंप की चमक तक का सफर आसान नहीं होता। सुकमा के माओवादी पुनर्वास केंद्र से आईं आठ युवतियों ने जब राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में प्रोफेशनल मॉडल्स के साथ रैंप पर कदम रखा, तो यह महज एक फैशन शो नहीं रहा, बल्कि बदलाव, आत्मविश्वास और नई जिंदगी की ओर बढ़ते कदमों की कहानी बन गया।
नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर आयोजित इस फैशन शो में इन युवतियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया। कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

जंगल के जीवन से बिल्कुल अलग था रैंप का अनुभव
इन युवतियों का पिछला जीवन जंगल और कठिन परिस्थितियों के बीच बीता है। इनमें कई युवतियां पहले माओवादी संगठन से जुड़ी रही थीं और हिंसक घटनाओं का हिस्सा भी बनीं।
रैंप, कैमरा, दर्शक और रोशनी उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था। शुरुआत में झिझक और घबराहट स्वाभाविक थी, लेकिन करीब एक सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद उनके आत्मविश्वास में बड़ा बदलाव दिखाई दिया।

सात दिन की ट्रेनिंग ने बदला अंदाज
रायपुर में युवतियों को करीब सात दिनों तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। मुंबई से आए प्रशिक्षक ओम ने उन्हें रैंप वॉक, बॉडी लैंग्वेज, प्रस्तुति और दर्शकों के सामने आत्मविश्वास के साथ खड़े होने का अभ्यास कराया।
शुरुआत में मंच और कैमरे के सामने आने में झिझक थी। लगातार अभ्यास के दौरान कदमों की गति, शरीर की मुद्रा और चेहरे के भावों पर काम किया गया। धीरे-धीरे युवतियों का डर कम हुआ और अंतिम प्रस्तुति में उनका आत्मविश्वास साफ नजर आया।
आठ युवतियों ने किया रैंप वॉक
फैशन शो में मीड़ियम गंगी, माड़वी नंदिनी, पोडियम राजे, माड़वी देवे, माड़वी मल्ले, डोडी रामे, पूनम देवे और पूनम ज्योति ने रैंप वॉक में हिस्सा लिया।
प्रोफेशनल मॉडल्स के साथ रैंप साझा करते हुए इन युवतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। तालियों की गूंज के बीच उनके कदमों में आत्मविश्वास नजर आया।
मीड़ियम गंगी के लिए नई राह का एहसास
मीड़ियम गंगी के लिए रैंप वॉक पूरी तरह नया अनुभव था। शुरुआत में उन्हें मंच और दर्शकों के सामने चलने को लेकर डर लगा, लेकिन लगातार अभ्यास के बाद उनकी झिझक कम हुई।
प्रोफेशनल मॉडल्स के साथ रैंप पर कदम मिलाते हुए उन्हें यह महसूस हुआ कि जिंदगी में पुराने रास्तों के अलावा नई राहें भी हो सकती हैं। दर्शकों की तालियों ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाया।
पूनम ज्योति ने तालियों से पाया आत्मविश्वास
पूनम ज्योति के लिए भी इतने लोगों के सामने प्रस्तुति देना पहली बार था। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने रैंप वॉक के साथ शरीर की मुद्रा और चेहरे के भावों पर काम किया।
जब वह दर्शकों के सामने पहुंचीं तो तालियों ने उनकी झिझक को आत्मविश्वास में बदलने में मदद की। उनके लिए यह अनुभव नई जिंदगी के प्रति उत्साह बढ़ाने वाला रहा।

पूनम देवे ने घबराहट को आत्मविश्वास में बदला
शुरुआत में रैंप देखकर घबराने वाली पूनम देवे ने लगातार अभ्यास के जरिए अपने कदमों और बॉडी लैंग्वेज पर नियंत्रण बनाया। अंतिम दिन जब वह रैंप पर उतरीं तो उनकी शुरुआती झिझक दिखाई नहीं दी।
इस अनुभव ने उन्हें यह समझने का मौका दिया कि आत्मविश्वास के साथ कई ऐसे काम किए जा सकते हैं, जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की थी।
माड़वी नंदिनी के लिए पुराने जीवन से आगे बढ़ने का संकेत
माड़वी नंदिनी ने प्रशिक्षण के दौरान लोगों के सामने सहज रहने और प्रस्तुति देने का अभ्यास किया। रैंप पर कदम रखते समय उन्हें लगा कि वह अपने पुराने जीवन से आगे बढ़ रही हैं।
मंच पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने इस भावना को और मजबूत किया। उनके लिए यह अवसर परिस्थितियां बदलने के साथ जीवन की दिशा बदलने का प्रतीक बना।
डोडी रामे ने खुद को नए रूप में पहचाना
डोडी रामे के लिए यह आयोजन सिर्फ फैशन से जुड़ा कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने इसे खुद को नए रूप में देखने का अवसर माना।
शुरुआती झिझक के बाद अभ्यास और दर्शकों की प्रतिक्रिया ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उनके लिए रैंप एक ऐसे अवसर का प्रतीक बना, जिसने उनकी छिपी क्षमताओं को सामने आने का मौका दिया।
सोशल मीडिया पर चर्चा में आया फैशन शो
इस आयोजन की चर्चा सिर्फ फैशन और रैंप वॉक की वजह से नहीं हुई। इसकी सबसे बड़ी वजह इसके पीछे छिपी बदलाव की कहानी रही।
पुनर्वास केंद्र से आईं युवतियों ने प्रोफेशनल मॉडल्स के साथ रैंप साझा किया। कभी हिंसा और कठिन परिस्थितियों से जुड़ा जीवन जी चुकीं युवतियां अब मुख्यधारा में अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश करती नजर आईं।
रैंप पर उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। कुछ मिनट की इस प्रस्तुति के पीछे संघर्ष, पुनर्वास, आत्मविश्वास और नई शुरुआत की लंबी कहानी दिखाई देती है।
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