नाव-जाल योजना और 50% मत्स्य बीज अनुदान का मिला लाभ, आधा हेक्टेयर तालाब में 1000 किलो मछली उत्पादन

नारायणपुर, 20 अगस्त 2026। अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों में सरकारी योजनाएं ग्रामीणों की आजीविका को नई दिशा देने में मदद कर रही हैं। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के ग्राम ओरछा निवासी श्री सोमारू राम उसेंडी ने मत्स्य पालन को रोजगार का साधन बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। शासन की नाव-जाल योजना, मत्स्य बीज पर अनुदान और विभागीय मार्गदर्शन की मदद से उन्होंने व्यवस्थित तरीके से मछली पालन किया और करीब 1.25 लाख रुपये की आय अर्जित की। इसमें लगभग 1 लाख रुपये की शुद्ध आय होने की जानकारी दी गई है।
नाव-जाल योजना से मिला काम को बढ़ाने का अवसर
श्री सोमारू राम उसेंडी लंबे समय से मत्स्य पालन से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2023-24 में उन्हें मत्स्य पालन प्रसार के तहत नाव-जाल योजना का लाभ मिला।
विभाग की ओर से जाल उपलब्ध कराए जाने से उन्हें मछली पकड़ने और मत्स्य गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिली। इस सरकारी सहायता ने उनके पारंपरिक कार्य को आय के बेहतर अवसर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आधा हेक्टेयर तालाब में शुरू किया व्यवस्थित मत्स्य पालन
विभागीय मार्गदर्शन मिलने के बाद श्री उसेंडी ने अपनी भूमि पर करीब 0.500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तालाब विकसित किया। मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत उन्हें मत्स्य बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान भी प्राप्त हुआ।
शासकीय सहायता और अपने योगदान से उन्होंने तालाब में मत्स्य बीज का संचयन किया और मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।
1000 किलो मछली उत्पादन, 1.25 लाख की बिक्री
मेहनत और सरकारी योजनाओं के बेहतर उपयोग का परिणाम उत्साहजनक रहा। उनके तालाब से करीब 1000 किलोग्राम मछली उत्पादन होने की संभावना दर्ज की गई।
उत्पादित मछलियों को स्थानीय हाट-बाजार में बेचकर उन्होंने करीब 1.25 लाख रुपये की आय अर्जित की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें लगभग 1 लाख रुपये की शुद्ध आय रही।
दूरस्थ गांवों में आजीविका का बन रहा नया मॉडल
सोमारू राम उसेंडी की सफलता यह बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ, विभागीय मार्गदर्शन और मेहनत मिलकर दूरस्थ क्षेत्रों में भी ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल सकते हैं।
मत्स्य पालन से प्राप्त अतिरिक्त आय ने उनके परिवार को आर्थिक संबल देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका का नया अवसर भी उपलब्ध कराया है।
योजनाओं से मत्स्य पालन को मिल रहा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ में मत्स्य विभाग द्वारा पात्र मछुआरों और अनुसूचित जनजाति वर्ग सहित अन्य हितग्राहियों को नाव-जाल, मत्स्य बीज और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन को ग्रामीणों के लिए आय और रोजगार के स्थायी साधन के रूप में विकसित करना है।
अबूझमाड़ के सोमारू राम उसेंडी की कहानी सरकारी योजनाओं के बेहतर उपयोग और मेहनत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ग्रामीण जीवन की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।
