2 हजार से अधिक किसान कर रहे तिलापिया पालन, रायपुर-धमतरी-कांकेर में विकसित होंगे तिलापिया क्लस्टर

रायपुर, 20 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव श्री अविलक्ष्य लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना मत्स्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में परिवर्तनकारी पहल साबित हो रही है।
उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से मत्स्य किसानों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और जरूरी अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।
छोटे किसानों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर
केंद्रीय सचिव ने कहा कि छोटे और मध्यम श्रेणी के कई मत्स्य किसानों की बैंकिंग सेवाओं तक सहज पहुंच नहीं हो पाती। ऐसे किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मत्स्य किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
छत्तीसगढ़ में विकसित होगा तिलापिया क्लस्टर
श्री लेखी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मत्स्य उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों में 34 मत्स्य क्लस्टर विकसित करने जा रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ का तिलापिया क्लस्टर भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि राज्य के मत्स्य क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं पर केंद्र सरकार करीब 900 करोड़ रुपये खर्च और स्वीकृत कर चुकी है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और प्रदेश में तिलापिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आयरलैंड और शिकागो तक पहुंच रही छत्तीसगढ़ की मछली
केंद्रीय सचिव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में उत्पादित मछलियों का निर्यात अब आयरलैंड, शिकागो सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो रहा है। प्रदेश में 2 हजार से अधिक किसान तिलापिया पालन कर रहे हैं।
इन किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए एक्सपोजर विजिट की कार्ययोजना तैयार करने, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन के लिए नई हैचरियां स्थापित करने और आधुनिक तकनीक के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है।
मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे स्थान पर छत्तीसगढ़
कृषि उत्पादन आयुक्त एवं मछलीपालन विभाग के सचिव श्री परदेशी ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार मत्स्य पालन को किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे और मछली उत्पादन में छठे स्थान पर पहुंच चुका है। प्रदेश में करीब 2.08 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र में 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया जा रहा है।
राज्य में वर्तमान में 2021 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियां, 1662 स्व-सहायता समूह, 123 मत्स्य हैचरियां, 102 मत्स्य बीज उत्पादन फार्म और 4 थोक मत्स्य बाजार संचालित हैं।
PMMSY के तहत 956.86 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत
श्री परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले छह वर्षों में छत्तीसगढ़ के लिए 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 272.37 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
योजना के तहत बायोफ्लॉक, आरएएस, केज कल्चर, तालाब निर्माण, लाइव फिश वेंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज और फीड मिल जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
बांगो जलाशय में 37.10 करोड़ से बनेगा एक्वा पार्क
कोरबा जिले के बांगो जलाशय में 37.10 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क की स्थापना की जा रही है। इससे क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
2026-27 के लिए 378.57 करोड़ की कार्ययोजना
वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसमें आधुनिक तकनीकों का विस्तार, मत्स्य अधोसंरचना को मजबूत करना, विपणन एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
‘नवा अंजोर/2047’ के तहत रायपुर, धमतरी और कांकेर जिलों में तिलापिया क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 37,857 लाख रुपये यानी करीब 378.57 करोड़ रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है।
किसानों की आय और निर्यात बढ़ाने पर फोकस
कार्यक्रम में केंद्रीय सचिव ने अधिकारियों को मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, वित्तीय समावेशन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन और निर्यात क्षमता को मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए।
बैठक में नाबार्ड, एमपीईडीए, सीफा सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में मत्स्य किसान और छत्तीसगढ़ राज्य मछुआरा बोर्ड के चेयरमैन उपस्थित रहे।
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