बिहान से जुड़ी महिलाओं ने स्थानीय बीजों से बनाई राखियां, सात विकासखंडों की चयनित महिलाओं का कलेक्टर ने किया सम्मान

रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाएं इस बार रक्षाबंधन पर्व को भाई-बहन के स्नेह के साथ हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ रही हैं। बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं धान, मक्का, बरबट्टी, लौकी, करेला, सेमी, कुम्हड़ा, भिंडी, उड़द, मसूर और मूंगफली सहित स्थानीय बीजों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। इन पर्यावरण हितैषी राखियों से महिलाओं को घर बैठे अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिल रहा है।
सात विकासखंडों की महिलाओं ने दिखाई रचनात्मकता
बीज राखी निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए जिले के सातों विकासखंडों में प्रतियोगिता आयोजित की गई। निर्णायक समिति ने प्रत्येक विकासखंड से उत्कृष्ट बीज राखी तैयार करने वाली एक-एक महिला का चयन किया।
चयनित महिलाओं में घरघोड़ा से गायत्री सिदार, धरमजयगढ़ से गणपति राठिया, तमनार से मंजरी गुप्ता, रायगढ़ से मालती मलाकार, पुसौर से बबीता पटेल और खरसिया से संगीता भारद्वाज शामिल हैं। चयनित महिलाओं ने जिला कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी सहित अधिकारियों को अपने हाथों से तैयार बीज राखियां पहनाईं। कलेक्टर ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया।
राखी के साथ पौधे का उपहार
बीज राखियों की खासियत यह है कि इन्हें उपयोग के बाद मिट्टी में दबाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकते हैं। महिलाओं ने बरबट्टी, मक्का, लौकी, करेला, सेमी, कुम्हड़ा, ग्वारफली, भिंडी, उड़द, मसूर, मूंगफली और धान सहित विभिन्न बीजों का उपयोग किया है।
फेविकोल, रंग, स्टीकर और धागे की सहायता से तैयार ये राखियां भाई-बहन के प्रेम के साथ हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं।
कम लागत में तैयार हो रही आकर्षक राखियां
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से कम लागत में तैयार की जा रही इन राखियों को लोगों की पसंद मिल रही है। इससे महिलाओं को रक्षाबंधन के अवसर पर नया उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिला है।
धरमजयगढ़ की गणपति राठिया ने बताया कि बीज राखियों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं खरसिया की संगीता भारद्वाज ने कहा कि प्लास्टिक की राखियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से स्थानीय बीजों का उपयोग किया गया है।
रायगढ़ की मालती मलाकार ने बताया कि उनकी राखियों में चना, तिल, उड़द, अरहर, सरसों, पालक और लाल भाजी सहित कई तरह के बीजों का उपयोग किया गया है। उपयोग के बाद इन राखियों को मिट्टी में दबाने से बीजों के अंकुरित होने की संभावना रहती है।
Most Viewed Posts
- छत्तीसगढ़ के 42 नर्सिंग संस्थानों की मान्यता रद्द, रायपुर के 15 कॉलेज शामिल
- लेबर क्वार्टर हादसे में कंपनी मालिकों पर एफआईआर, महिला मजदूर की मौत के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
- सहकारिता सप्ताह का समापन, किसानों को मिली योजनाओं की जानकारी
- ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत रायगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 49.50 लाख की चिटफंड ठगी मामले में दो फरार आरोपी गिरफ्तार
- छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा प्रमोशन, 61 SI बने इंस्पेक्टर
ये भी पढ़े…..
- खरसिया में शादी का झांसा देकर युवती से शोषण का आरोप, युवक गिरफ्तार
- रायगढ़ में बारिश के बाद कई मार्गों पर जलभराव, चक्रपथ रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक रहेगा बंद
- रायगढ़ में नवाचारी शिक्षण को मिला सम्मान, उत्कृष्ट शिक्षकों को कलेक्टर ने किया पुरस्कृत
- पुसौर में शिक्षा विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक, कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं पर जोर
- रायगढ़ में बीजों से तैयार हो रहीं अनूठी राखियां, भाई-बहन के प्रेम के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
