सिकोला भाठा स्थित आवास पर करीब आठ अधिकारियों की टीम पहुंची, परिवार की सरकारी नियुक्तियां और संपत्तियां भी चर्चा में

भिलाई। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई दुर्ग तक पहुंची है। मंगलवार को ईडी की टीम ने सिकोला भाठा स्थित बंगाली कॉलोनी में पूर्व पटवारी संघ प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह राजपूत के निवास पर दबिश दी।
जानकारी के मुताबिक, करीब आठ अधिकारियों की टीम दो वाहनों से उनके घर पहुंची। टीम ने आवास पर विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई के दौरान कुछ दस्तावेज अपने साथ ले जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, ईडी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
परिवार की सरकारी नियुक्तियां भी चर्चा में
कमलेश सिंह राजपूत लंबे समय तक पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। ईडी की कार्रवाई के बाद उनके परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों और उनसे संबंधित रिकॉर्ड भी चर्चा में आ गए हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवार के सदस्यों में दीपाली राजपूत उपपंजीयक, निवेदिता राजपूत पटवारी, स्वप्निल सिंह राजपूत पटवारी और योगेश सिंह राजपूत नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।
हालांकि, इन नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए केवल नियुक्तियों के आधार पर किसी तरह का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नियुक्तियों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल संभव
ईडी की कार्रवाई के बाद अब जांच के संभावित दायरे को लेकर भी चर्चा हो रही है। यदि जांच एजेंसी को दस्तावेजों में कोई संबंधित कड़ी मिलती है, तो परिवार के सदस्यों की नियुक्तियों, आर्थिक लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा सकती है।
इसमें जमीन, मकान, प्लॉट या अन्य अचल संपत्तियों की खरीद, रजिस्ट्री की तारीख, दर्ज मूल्य और आय के स्रोतों से संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, फिलहाल सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई प्रमाणित दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिसमें परिवार की संपत्तियों की पूरी सूची, उनका रकबा या बाजार मूल्य आधिकारिक तौर पर जारी किया गया हो।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
CGPSC मामले में ईडी की कार्रवाई के बीच दुर्ग में हुई यह कार्रवाई जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घर से मिले दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनका मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं।
फिलहाल ईडी की ओर से कमलेश सिंह राजपूत या उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ किसी अंतिम निष्कर्ष या आरोप की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संपत्ति को अवैध अथवा आय से अधिक बताना उचित नहीं होगा।
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