30,841 हेक्टेयर कृषि रकबे में विकसित होगी जलवायु अनुकूल खेती, धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जी और औषधीय फसलों को मिलेगा बढ़ावा

धमतरी, 3 सितंबर 2026। नदी तट से लगे गांवों में खेती को अधिक लाभदायक, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने के लिए धमतरी जिले में फसल विविधीकरण की व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके तहत महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून नदी किनारे बसे 152 गांवों को चिन्हित किया गया है। योजना से करीब 38 हजार किसान और 30,841.96 हेक्टेयर कृषि रकबा लाभान्वित होगा।
कार्ययोजना के तहत गांवों में भूमि की ऊंचाई, जलभराव, मिट्टी की स्थिति, जल निकासी और सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग फसल प्रणाली विकसित की जाएगी। अभियान को सितंबर-अक्टूबर से शुरू करने की तैयारी है।
चार नदियों के किनारे 152 गांव चिन्हित
जिले में महानदी के किनारे 97 गांव, पैरी नदी के किनारे 18, सोंढूर नदी के किनारे 23 और खारून नदी के किनारे 14 गांव चिन्हित किए गए हैं।
किसानों की मांग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नवंबर-दिसंबर में दलहन-तिलहन के बीज तथा औषधीय पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
धान के साथ खेती के नए विकल्प
फसल विविधीकरण का उद्देश्य धान की खेती को समाप्त करना नहीं है, बल्कि किसानों को एक ही फसल पर निर्भरता से बाहर निकालना है। अधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में धान प्रमुख फसल रहेगा, जबकि कटाई के बाद भूमि की क्षमता के अनुसार रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
अच्छी जल निकासी वाली भूमि में धान के बाद मक्का, मूंग और उड़द जैसी फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं ऊंची भूमि में दलहन-तिलहन, सब्जी, औषधीय फसल, फलदार पौधों और चारा आधारित खेती के मॉडल विकसित किए जाएंगे।
जमीन के हिसाब से तीन जोन में होगी खेती
कार्ययोजना में भूमि की स्थिति के आधार पर तीन जोन प्रस्तावित किए गए हैं।
अति निम्न एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र: यहां धान के साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
मध्यम ऊंचाई और मौसमी जलभराव वाले क्षेत्र: यहां धान के बाद कम अवधि वाली दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
ऊंची और बेहतर जल निकासी वाली भूमि: ऐसे क्षेत्रों में औषधीय फसल, दलहन-तिलहन, सब्जी, फलदार पौधों तथा जैविक और प्राकृतिक खेती के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।
5,458 हेक्टेयर में रबी फसलों का विस्तार
नदी किनारे के गांवों में रबी फसलों के लिए कुल 5,458.90 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है। इसमें चना 3,244.10 हेक्टेयर, गेहूं 662.80 हेक्टेयर, सरसों 472.50 हेक्टेयर, मक्का 243.90 हेक्टेयर, उड़द 214.80 हेक्टेयर, मूंग 178.70 हेक्टेयर, मूंगफली 142.20 हेक्टेयर, सूरजमुखी 39 हेक्टेयर और औषधीय फसल 110.60 हेक्टेयर शामिल हैं।
जल संरक्षण के साथ खेती को मिलेगा मजबूत आधार
फसल विविधीकरण के साथ जल संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। महानदी किनारे धमतरी और मगरलोड विकासखंड में 36 नालों की सफाई, 19 फार्म पॉण्ड और 17 सोकपिट प्रस्तावित हैं। मगरलोड में 7 चेकडैम/एमआईटी सुधार के कार्य भी प्रस्तावित किए गए हैं।
इसके अलावा 75 नदी तटवर्ती गांवों में तटीय घास और पौधरोपण किया जाएगा। खेत से नाले और नाले से नदी तक पानी के अनियंत्रित बहाव को रोकने के लिए माइक्रो-वाटरशेड आधारित कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
कलेक्टर ने बताया किसानों की आय बढ़ाना लक्ष्य
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि नदी किनारे के क्षेत्रों में खेती की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। इसलिए स्थानीय भू-आकृति और पानी की उपलब्धता के आधार पर गांववार माइक्रो-प्लान तैयार कर फसल का चयन किया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण का उद्देश्य किसानों को उनकी जमीन के अनुरूप अधिक विकल्प उपलब्ध कराना, खेती के जोखिम को कम करना और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है। जल संरक्षण, सिंचाई सुविधा, फसल प्रदर्शन और किसान प्रशिक्षण को साथ लेकर ऐसी कृषि प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जो वर्तमान के साथ भविष्य की जरूरतों के लिए भी टिकाऊ हो।
गांव-गांव होगा सर्वे, खेतों में होंगे फसल प्रदर्शन
योजना के तहत प्रत्येक गांव में भूमि, ढाल, जलभराव, मिट्टी, नाला और भूजल की स्थिति का सर्वे किया जाएगा। इसके आधार पर माइक्रो-प्लान तैयार होगा।
धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी क्षेत्रों में उड़द-मूंग, मूंगफली, रागी, सरसों, मक्का और चना जैसी फसलों के प्रदर्शन भी प्रस्तावित हैं। इससे किसानों को अपने खेतों में वैकल्पिक फसलों की खेती और उससे होने वाले लाभ का व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा।
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