सतनाम पंथ के लोगों ने जैतखाम में पूजा-अर्चना कर मनाया जन्म स्मृति दिवस, बाइक रैली में आसपास के 25 से 30 गांवों के लोग हुए शामिल

पंडरिया। सतनाम पंथ के लोगों ने गुरु बालकदास जयंती के अवसर पर पंडरिया क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में उत्साह और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम आयोजित किए। जैतखाम में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ। इसके बाद दोपहर में डीजे के साथ बाइक रैली निकाली गई, जिसमें आसपास के करीब 25 से 30 गांवों का भ्रमण किया गया।
रैली में युवाओं के साथ महिलाएं और बालिकाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने विभिन्न तरह के हुनर का प्रदर्शन किया। बाइक रैली के बाद समाज के लोग वापस जैतखाम पहुंचे, जहां गुरु बालकदास की पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
जैतखाम में विशेष पूजा और मंगल आरती
जन्म स्मृति दिवस के अवसर पर समाज के लोगों ने पवित्र जैतखाम और गुरु बालकदास के छायाचित्र की विशेष पूजा-अर्चना की। मंगल आरती के दौरान समाज के लोगों ने गुरु के जयकारे लगाए।
कार्यक्रम में साहेब लाल और उनके कलाकारों ने मंगल भजन ‘गुरु ज्ञान के महिमा मा नहा लेगा’ की प्रस्तुति दी। इसके बाद पंथी गीत ‘कहे बाबा घासीदास, सतनाम बोल’ पर समाज के लोग उत्साह के साथ झूमते नजर आए।
इस अवसर पर सतनाम पंथ के लोगों ने गुरु बालकदास के समाजोत्थान से जुड़े अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
गुरु घासीदास के पुत्र थे गुरु बालकदास
गुरु बालकदास को सतनाम पंथ के प्रमुख व्यक्तित्वों में माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका जन्म 18 अगस्त 1805 को भादो महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन गिरौदपुरी में हुआ था। वे गुरु घासीदास के पुत्र थे।
उनकी स्मृति में हर वर्ष जन्म तिथि के अवसर पर समाज द्वारा जन्म स्मृति दिवस और विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की बात
समाजसेवी महेंद्र घृतलहरे ने गुरु बालकदास के जीवन और सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि वे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते थे।
उन्होंने कहा कि गुरु बालकदास के सामाजिक आंदोलन और वीरता से प्रभावित होकर अंग्रेज गवर्नर द्वारा उन्हें स्वर्ण जड़ित तलवार और हाथी भेंट किए जाने तथा राजा की पदवी दिए जाने की बात समाज में प्रचलित है।
महिलाओं और युवाओं की रही सक्रिय भागीदारी
जयंती कार्यक्रम में समाज के युवाओं के साथ महिलाओं और बालिकाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बाइक रैली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
पूरे आयोजन में सामाजिक एकजुटता, धार्मिक आस्था और गुरु बालकदास के विचारों को याद करने का संदेश दिखाई दिया।
