राज्यपाल रमेन डेका ने समिति गठन की बात कही, भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण और शब्दकोश समेत संदर्भ सामग्री जुटाई जाएगी

रायपुर, 8 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल शुरू हुई है। इसी सिलसिले में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेन डेका से लोक भवन में मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन, विकास और उसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
राज्यपाल से हुई छत्तीसगढ़ी भाषा को लेकर चर्चा
भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश और भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा और प्रमुख संपर्क भाषा है तथा लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।
भाषाविदों ने संविधान की आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी को शामिल किए जाने की आवश्यकता और इसके लिए उपलब्ध ऐतिहासिक एवं साहित्यिक आधारों की जानकारी भी राज्यपाल के सामने रखी।
समिति के गठन की बात
राज्यपाल रमेन डेका ने इस विषय पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और उसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में आवश्यक पहल की जाएगी।
उन्होंने इस संबंध में एक समिति के गठन की बात कही। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश और अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए भाषा के विद्वानों और विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी एवं सुझाव भी लिए जाएंगे।
राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।
15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की परंपरा
भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना और पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में छत्तीसगढ़ी साहित्य की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तैयार हुआ था, जबकि पहला शब्दकोश 1939 में तैयार किया गया। वर्ष 1924 में ‘हीरू के कहिनी’ नामक पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास प्रकाशित हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ी का विस्तार
भाषाविदों के अनुसार प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी भाषा का अध्ययन कराया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने यह भी बताया कि पंडित सुंदरलाल शर्मा ने जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन किया था, जो छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है।
भाषाविदों ने रखा पक्ष
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक और श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित रहीं।
अब समिति के गठन और संदर्भ सामग्री के संकलन की प्रक्रिया के जरिए छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में आगे की पहल होने की उम्मीद है।
